सपनों को पूरा करने की चाह आपको किस हद तक जुनूनी बना देती है, इसका अंदाजा आप इन दो देसी गर्ल्स की कहानी से लगा सकते हैं। दोनों हैं भारत की बेटियां लेकिन वर्षों से अपनी अक्लमंदी का लोहा अमेरिका में मनवा रही हैं।
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एक ने पढ़ाई के बाद दुनिया की अव्वल सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी की तो एक ने बोस्टन यूनिवर्सिटी में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर काम किया। अपने काम से दोनों ने अमेरिका में सफलता के झंडे गाड़े।
लेकिन सफलता की कहानी को शायद एक और दिलचस्प मोड़ का इंतजार था। इसलिए दोनों ने एशो-आराम की नौकरी को अलविदा कहने में झिझक नहीं की और एक नए लक्ष्य को साधा। भारत की देसी रेसिपीज और मसालों की फेहरिस्त तैयार की। एक वैन खरीदी और देसी चटखारों से अमेरिकियों की दिल और जुबां पर राज करने लगीं।
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ये दो देसी गर्ल्स शमा जोशी और सीमा पाई की सफलता की कहानी है। इनकी कहानी न सिर्फ लड़कियों को प्रेरित करेगी, बल्कि उन लोगों को भी एक हिम्मती राह दिखाएगी जो नौकरी और अपने मन के काम के बीच की कश्मकश में फंसे रहते हैं। जो ये तय नहीं कर पाते कि उन्हें जीवन में क्या करना है और सफलता के मायने उनके लिए क्या हैं? आगे की स्लाइड में पढ़ें पूरी सक्सेस स्टोरी।
माइक्रोसॉफ्ट इम्प्लॉयी काठी रोल बेचती दिखी तो लोग हैरान रह गए
चला काठी रोल, कढ़ी-चावल का जादू
- फोटो : www.seattletimes.com
माइक्रोसॉफ्ट के ऑफिस में काम करने वाली शमा जोशी जब एक दिन अचानक एक फूड ट्रक में काठी रोल बनाकर बेचती दिखीं तो उन लोगों की हैरानी का ठिकाना नहीं रहा जो उनके साथ ही लक्जरी जॉब कर रहे थे। लोगों को यकीन नहीं हो पा रहा था। वो आते, शमा को देखते। कुछ मजाक करते कि ये तुम ही हो? कुछ मुस्कुराकर रह जाते तो कुछ कहते कि वन रोल प्लीज।
शमा ने सियाटल के रेडमंड स्थित इलाके में उसी माइक्रोसॉफ्ट कैंपस में अपना फूड ट्रक 'रोल ओके प्लीज' लगा दिया, जहां वो 14 वर्षों तक बतौर सॉफ्टवेयर डेवलपर काम करती रही थीं। शमां के इस नए काम में उनकी पुरानी कॉलेज फ्रेंड सीमा पाई भी साथ आ गईं। सीमा पाई अमेरिका में ही बोस्टन यूनिवर्सिटी में मार्केटिंग स्ट्रीम में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर जॉब कर रही थीं।
शमा बताती हैं कि वो और सीमा जब कभी दोस्तों को दावत पर बुलातीं तो मजाक-मजाक में कहतीं कि वो एक दिन स्ट्रीट फूड स्टेंड खोलेंगी। तब पता नहीं था कि मजाक में कही वो बात सच साबित होगी।
दो सहेलियों के हाथ का जादू चल निकला
लोगों को खूब भा रहे हैं भारतीय चटखारे
- फोटो : www.seattletimes.com
शमा कहती हैं कि उन्होंने कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की। सबसे बड़े सॉफ्टवेयर वर्ल्ड में काम किया। लेकिन कई वर्षों तक काम करने के बाद उनका नौकरी के प्रति लगाव कम होने लगा। वो कहती हैं कि नौकरी के लिए वो जुनून खत्म हो गया जिसका वह लुत्फ लेती हैं। इसलिए हॉबी को करियर बनाने का फैसला किया।
शमा चूंकि मूल रूप से भारत की हैं इसलिए रगों में भी भारतीय व्यंजनों की एनर्जी दौड़ती है। फैसला कर लिया कि चटपटे काठी रोल, कड़ी-चावल, राजमा चावल का स्वाद अमेरिकियों को चखाएंगी।
इधर शमां ने फैसला किया उधर सीमा भी तैयार हो गईं। सीमा ने भी नौकरी को बाय-बाय कह दिया। सीमा कहती हैं कि इस काम में हर दिन नया रोमांच और नई कहानी है।
शमा जोशी के पिता भारतीय सेना में थे। पिता का तबादला होता तो परिवार भी उनके साथ एक से दूसरी जगह जाता। इस दौरान शमां ने भारत में जगह-जगह कई प्रकार के लजीज व्यंजनों का लुत्फ लिया।
सीमा पाई मुंबई से हैं। इसलिए मायानगरी में ही देशभर के चटखारों का लुत्फ लेती रहीं।
सीमा कहती हैं कि अमेरिकी रेस्टोरेंट में भारतीय व्यंजनों में ज्यादातर साग पनीर, बिरयानी उपलब्ध रहती है। इसलिए उन्होंने ठान लिया कि वो भारत की विविधता के विविध चटखारे अमेरिका में परोसेंगी। देसी चटखारे यहां लोगों को खूब भा रहे हैं। वो इन्हें चाव से खाते हैं।
शमा कहती हैं कि ये वाकई में दिलचस्प है कि सियाटल के लोगों के ये देसी व्यंजन खूब पसंद आ रहे हैं। शमा के मुताबिक शुरू में छोटी-मोटी मुश्किलें आईं। ये फैसला काफी रिस्की था। हमें हेल्थ डिपार्टमेंट के नियम सीखने पड़े। मेन्यू बना लिया तो फिर ट्रक को तैयार करने की भी एक चुनौती थी। लेकिन नौकरी के दिनों की कई समझदारियां यहां काम आईं। हौसला बरकरार रखा। दोस्तों और करीबियों का साथ मिला और कारवां बढ़ता गया।
आज अमेरिका ही नहीं दुनिया भर में शमां और सीमा के 'रोल ओके प्लीज' के चर्चे हैं। आपको कैसी लगी दो देसी गर्ल्स की ये सक्सेस स्टोरी कमेंट बॉक्स में कमेंट लिखना न भूलें। आपको पसंद आई तो दोस्तों को भी शेयर करें।