ईमानदारी से जुटा रहा
जब मैंने पीएच. डी. में प्रवेश लिया था, तब मैं इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं था कि मुझे गणितज्ञ होने के नाते कोई ढंग की नौकरी मिलेगी। मैंने सोच रखा था कि मैं बिना किसी हड़बड़ी के इस क्षेत्र को पर्याप्त समय दूंगा, फिर भी अगर कुछ हासिल नहीं हुआ, तो किसी दूसरे क्षेत्र में हाथ आजमाऊंगा। सौभाग्य से इसकी नौबत नहीं आई। धैर्य के साथ किए गए ईमानदार प्रयासों ने अपना रंग दिखाया।
गणित उबाऊ नहीं है
गणित में 'नंबर थ्योरी' मेरा पसंदीदा क्षेत्र है। इसे 'क्वीन ऑफ मैथेमेटिक्स' कहा जाता है। मेरा काम इस थ्योरी के कई ऐसे पहलुओं पर है, जो अभी तक सामने नहीं आए थे। लोगों को लगता है कि गणित बहुत उबाऊ है। ऐसा है नहीं, इसमें कई मजेदार चीजें हैं। यदि आप चाहें, तो ज्यामिति, कैलकुलस और सममिति के किसी भी समीकरण को आनंद के साथ हल कर सकते हैं। दिक्कत यह है कि छात्रों को गणित के वास्तविक सिद्धांत न बताकर कुछ और ही पढ़ाया जाता है। अधिकांश गणितज्ञ इसे विज्ञान के दूसरे विषयों के समान मानते हैं। मैंने हमेशा से यही कोशिश की है कि छात्रों को गणित के व्यापक संदर्भ समझाते हुए इसे अधिक आकर्षक और प्रासंगिक बनाया जाए।
गणित का नोबेल कहे जाने वाले प्रतिष्ठित फील्ड पदक पाने से पहले मुझे इस क्षेत्र के कई अन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है, जिनमें ओस्ट्रोस्की पुरस्कार, इंफोसिस पुरस्कार, सलेम पुरस्कार और रामानुजन पुरस्कार शामिल हैं। मैंने 2004 से 2006 तक न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के रूप में कार्य किया। मैं फिलहाल कैलिफोर्निया की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ा रहा हूं। मैं खुद को बहुत खुशकिस्मत मानता हूं, क्योंकि फील्ड पदक पाने वाला मैं सिर्फ दूसरा ऑस्ट्रेलियाई व्यक्ति हूं। मुझसे पहले 2006 में डॉक्टर टेरेंस ताओ को यह पदक मिला था।
-भारतवंशी ऑस्ट्रेलियाई गणितज्ञ के साक्षात्कारों पर आधारित।