एक टीवी चैनल से बातचीत में वनिशा ने बताया कि मुझे मुख्य रूप से मेरे माता-पिता की यादों ने प्रेरित किया और यह मुझे जीवन भर प्रेरित करेगी। लेकिन छोटा भाई अभी प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है। वनिशा ने कहा, मेरी मां ने मुझसे जो आखिरी बात कही थी, वह थी, बस खुद पर विश्वास करो... हम जल्द ही वापस आएंगे। मेरे पिता के आखिरी शब्द थे बेटा, हिम्मत रखना।
आखिरी बार अस्पताल जाते देखा था
उल्लेखनीय है कि वनिशा के पिता जीतेंद्र कुमार पाठक एक वित्तीय सलाहकार थे, और उसकी मां, डॉ सीमा पाठक एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका थीं। जब वे एक साथ अस्पताल के लिए निकले थे, तब आखिरी बार उसने उन्हें जीवित देखा था। इसके बाद सिर्फ एक भयानक खबर मिली और उसकी पूरी खुशहाल दुनिया उजड़ गई। इस विपदा के साथ ही उसकी परीक्षाएं भी नजदीक थीं। अभी, वनिशा और उसका भाई अपने मामा - भोपाल के एक कॉलेज में प्रोफेसर डॉ अशोक कुमार के साथ रहते हैं।
पापा का सपना ही मेरा सपना है
बकौल वनिशा, मेरे पिता मुझे आईआईटी में पढ़ते देखना या यूपीएससी को क्रैक करके देश की सेवा करते चाहते थे। उनका यही सपना, अब मेरा सपना है। अपने आंसुओं को रोकते हुए, उदास स्वरों को एक कविता के रूप में व्यक्त करती हुई कहती हैं- मैं एक मजबूत लड़की बनूंगी, डैडी, आपके बिना ...।