फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तानों की न की परवाह, पाई कामयाबी!

Mon, 01 Sep 2014 01:48 PM IST
एजुकेशन डेस्क
विज्ञापन
विज्ञापन
आत्मविश्वास और हिम्मत हो, तो बड़ी मुश्किलों पर भी फतह हासिल की जा सकती है। दिल्ली के शाहदरा निवासी रक्षित मलिक ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। नोएडा के एमिटी इंटरनेशनल स्कूल के छात्र रक्षित आंख की बीमारी से पीड़ित हैं। इसके बावजूद सीबीएसई के दसवीं बोर्ड की परीक्षा में उन्होंने स्पेशल कैटेगरी में सीजीपीए 10 हासिल करने में सफलता पाई। पेश है, उनसे एक मुलाकात-
विज्ञापन

क्या आपने इस तरह के रिजल्ट की उम्मीद की थी?
अच्छे ग्रेड की उम्मीद न करते हुए मैंने सिर्फ पढ़ाई में मेहनत की थी। नतीता तो अच्छे रिजल्ट के रूप में स्वतः ही सामने आ गया।
अपनी बीमारी के बारे में बताएं?
मेरी बीमारी का संबंध आंखों से है और इसे मैक्यूलर डी जेनरेशन कहा जाता है। इस बीमारी से पीडि़त मरीज को देखने में परेशानी होती है। आंख के रेटिना में दिक्कत होने के चलते दो मीटर से ज्यादा दूर दिखाई नहीं देता है और बहुत छोटी चीज देखने में भी दिक्कत होती है।
इस बीमारी से पढ़ाई में कितनी दिक्कत होती है?
छोटे अक्षर और छोटी लिखावट दिखाई नहीं देती, इसलिए किताबों और नोट्स की फोटोकॉपी बड़े आकार में करवानी पड़ती है।
स्कूल से आपको किस तरह की मदद मिली?
स्कूल से मुझे इस बाबत काफी मदद मिली। मेरे लिए स्पेशल पेपर तैयार करवाए गए, जिनमें बड़े आकार के शब्द प्रिंट किए जाते हैं। इस तरीके से पेपर पढ़कर जवाब लिख पाना आसान हो गया।
विज्ञापन

पढ़ाई के अलावा इस बीमारी के कारण आपको किस तरह की समस्या का सामना करना पड़ा?
कई लोग इस बीमारी के चलते ताना देते थे। वह कहते थे कि तुम परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाओगे। इसके बावजूद मैंने कभी हिम्मत नहीं हारी। वैसे अभिभावक और कई अच्छे दोस्त हमेशा हौसला बढ़ाते थे।
पढ़ाई की आपकी दिनचर्या क्या थी?
तैयारी के लिए मैंने कोई विशेष शेड्यूल फिक्स नहीं किया था। रोजाना कभी चार से पांच घंटे तो कभी आठ घंटे तक पढ़ाई करता था।
आगे की क्या योजना है?
12वी बोर्ड परीक्षा में भी ऐसे ही अंक लाने के लिए प्रयत्नशील रहूंगा। हालांकि स्कूल की तरह सीबीएसई बड़े आकार के शब्दों को प्रिंट कर पेपर नहीं देगी, लेकिन सीबीएसई स्पेशल श्रेणी के बच्चों को अपने साथ पेपर पढ़कर सुनाने के लिए परीक्षार्थी से कम उम्र के विद्यार्थी को परीक्षा कक्ष में ले जाने की अनुमति देगी। इस सुविधा का लाभ उठाया जाएगा।
भविष्य के किस क्षेत्र में कैरियर बनाने की इच्छा है?
साइकोलॉजी या डिजाइनिंग के क्षेत्र में मैं कैरियर बनाने की तमन्ना है। डिजाइनिंग में मेरी खास रुचि है।
अपने परिवार के बारे में बताएं?
मेरे पिता इलेक्ट्रॉनिक्स बिजनेस में हैं। आपको बता दूं कि मेरे बड़े भाई भी इस बीमारी से ग्रस्त हैं, पर अपनी मेहनत के बल पर आज वह श्रीराम कॉलेज में पढ़ रहे हैं।  
विज्ञापन

विद्यार्थियों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
विपरीत परिस्थितियों में भी हौसला कम न होने दें। जब पर्याप्त मेहनत करेंगे, तो रिजल्ट भी अच्छा आएगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें