पूरी दुनिया आज मदर्स डे मना रही है। इसकी नजीर लेकिन देखना हो तो आगरा के गांव कचोरा आइए। यहां पिछले तीन साल से रोज मदर्स डे मनाया जा रहा है। क्योंकि खारे पानी वाले क्षेत्र के इस गांव और इसके नगला में बसे करीब 15,000 लोगों को सुबह-शाम बिना नागा तीन घंटे मीठा पानी मिल रहा है तो यह एक मां का ही वरदान है।
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ग्राम प्रधान पोहप सिंह उर्फ पप्पे ने यह सारा प्रबंध मां ग्यासो देवी की इच्छा पूरी करने के लिए खुद के खर्चे पर किया है। इसके साथ ही उन्होंने टीटीएसपी के नाम पर करोड़ों व्यर्थ बहाने वाली और पानी पर सियासत में उलझी सरकारों को आईना भी दिखाया है।
मां के आशीर्वाद की यह कहानी कचोरा गांव में लगभग तीन साल पहले लिखी गई। ओवरहेड टैंक और टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट (टीटीएसपी) गांव में थे लेकिन पानी नहीं मिलता था। किसान पोहप सिंह उर्फ पप्पे ने इस संकट में अपने खेतों और घर के लिए पानी का प्रबंध करने की सोची। पानी मीठा मिले इसलिए तीन किलोमीटर दूर गांव बस्तई के पास जमीन खरीदी। वहां 120 फीट बोरिंग कराकर खेतों से होते अपने घर तक दो इंच की पाइप लाइन डलवाई। घर में पानी आया तो बाहर एक नल गांव वालों के लिए भी लगवा दिया।
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वहां सुबह-शाम पानी भरने के लिए औरतों और बच्चों की भीड़ लगी रहती। करीब 70 साल की हो चली पप्पे की मां ग्यासो देवी रोज देखती थीं। एक दिन उन्होंने पप्पे से कहा, ‘बेटा, हमें तो पानी मिल गया। यहां से भी सब तो पानी भर नहीं पाते। पानी पिलाना तो पुण्य का काम है। अपनी कमाई में से कुछ इसके लिए भी लगा ताकि बाकी लोगों को आराम से पानी मिल सके।’
यहां हर रोज होता है 'मदर्स डे'
पप्पे प्रधान की मां ग्यासो देवी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
मदर्स डे मनाने वाले गांव की मिट्टी से उठे इस संदेश से सबक ले सकते हैं। मां ने तो इच्छा जताई थी, पोहप सिंह के लिए वह आदेश था और संकल्प भी। जुट गए। तीन किलोमीटर दूर लगे पंप से पांच इंच की दूसरी पाइप लाइन करीब दो तिहाई गांव में बिछवाई। इसमें जगह-जगह कुल 20 एयर वाल्व लगाए गए ताकि पानी के प्रेशर से पाइप लाइन को फटने से बचाया जा सके।
नई पाइप लाइन से कचोरा गांव और इसके नगला में करीब छह सौ परिवारों को कनेक्शन दिए। सुबह-शाम तीन-तीन घंटे जलापूर्ति शुरू कराई। गांव के बाकी हिस्से के लिए नगला थोक का टैंक भरा जाता है।
बिजली कटौती पर यह क्रम बाधित न हो इसके लिए जेनरेटर लगवाया। इस लाइन का आखिरी छोर भी पोहप सिंह के घर पर है। वहां दो इंच वाली लाइन से तो 24 घंटे पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इस व्यवस्था का लाभ अछनेरा, कचोरा, मई, बस्तई, जनूथा, मंगुर्रा, आदि गांवों के लोगों को भी मिलता है। वे टैंकर में पानी भरकर ले जाते हैं।
वाल्वों, पाइपलाइन और जलापूर्ति की देखरेख के लिए नानक उर्फ नानो नामक कर्मचारी नियुक्त है। तीनों बेटे अरविन्द, सतेन्द्र, और पुष्पेन्द्र भी सहयोग करते हैं। लोगों को पानी नि:शुल्क मिलता है लेकिन रखरखाव, बिजली और जेनरेटर के लिए डीजल पर प्रति माह आने वाला लगभग 10 हजार रुपए का व्यय पोहप सिंह खुद वहन करते हैं। वह बताते हैं कि स्थायी प्रबंधों पर करीब 12 लाख रुपए व्यय हुए थे पर मां की खुशी के आगे इसका क्या मोल।
ग्राम पंचायतों के पिछले चुनाव में गांव वालों के दबाव में उन्हें प्रधानी के लिए पर्चा भरना पड़ा। नामांकन में बड़ी संख्या में गांव से महिलाएं उनके साथ गईं। उनके खिलाफ 10 प्रत्याशी थे पर सबने मिलकर जितना वोट पाए, पप्पे को अकेले उतने वोट मिले। यह भी कहा जाता है कि उन्हें हराने के लिए कुछ प्रतिद्वंद्वियों ने जमकर शराब बांटी पर जीत पानी बांटने वाले पप्पे की ही हुई।
गांव की मछला देवी, मैमवती, मीना, सोनिया, मालती आदि तो प्रधान जी को देवता बताती हैं। लेकिन पप्पे आज भी उतने ही सरल हैं। रोज गांव का चक्कर लगाना, लोगों की समस्याएं जानना उनकी दिनचर्या में शामिल है।
तस्वीर बदल देने वाला कदम है यह: बीडीओ
अछनेरा की खंड विकास अधिकारी सुप्रिया मिश्रा ने बताया कि उन्होंने कचोरा गांव के प्रधान पोहप सिंह द्वारा अपने संसाधनों से की गई जलापूर्ति व्यवस्था देखी है। ऐसे प्रयास अन्य जगह भी हों तो गांवों की तस्वीर बदल सकती है। जल निगम के जूनियर इंजीनियर सुनील कुमार भी पप्पे की सराहना करते हैं। बोले, गांव की टंकी और टीटीएसपी देखरेख की कमी से सफल नहीं हो पा रही है। जनसहयोग के लिए वह ग्रामीणों को जागरूक करने का प्रयास करेंगे।
पप्पे प्रधान का ये कार्य उत्कृष्ट और सराहनीय है। ये उनकी मां और सैकड़ों परिवारों की मांओं को सबसे अच्छा मदर्स डे का उपहार है। कामयाबी की इस कहानी से देश की तमाम पंचायतों के प्रधान सीख ले सकते हैं और आप भी।
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