जैसे ही प्रबोध कुमार ने उनकी फर्स्ट कॉपी पढ़ी तो उनके आंखों में आंसू थे। उन्होंने बेबी की किताब को हिंदी में ट्रांस्लेट किया। कुमार ने किताब को दोस्तों और परिचितों को दी। जिन्होंने प्रशंसा पत्र भेजा। जिसके बाद उन्होंने किताब को प्रकाशन में छपने भेजा। जैसे ही उन्होंने सबसे पहले किताब को देखा तो बेबी को यकीन नहीं हुआ कि उन्होंने इतना शानदार लिखा है।
2002 में उनकी पहली किताब 'आलो आंधारी' नाम से आई। इसी साल उनकी ये किताब अंग्रेजी में पब्लिश हुई थी। साहित्य की दुनिया में बेबी अब चर्चित नाम है। वो अब रोज इंटरव्यू देती हैं। पेरिस, हॉन्ग कॉन्ग जैसे देशों में वो टूर कर चुकी हैं। 24 भाषाओं में उनकी किताब ट्रांस्लेट हो चुकी हैं। दुनिया के कई हिस्सों में वो लिट्रेचर फेस्टिवल अटेंड कर चुकी हैं। 2002 से अब तक बेबी 4 किताबें लिख चुकी हैं।
आज भी लोग बेबी से यही एक सवाल पूछते हैं कि एक मशहूर लेखिका बनने के बावजूद वो घर का काम क्यों करती हैं। जिसपर बेबी यही जवाब देती हैं कि जिन्होंने मुझे काम दिया और लेखन के लिए प्रेरित किया उन्हें छोड़कर नहीं जाउंगी।
बेबी की मानें तो एक लेखिका के रुप में उनका दूसरा जन्म हुआ है और उनकी लिखी हुई कहानी लोगों के दिलों को स्पर्श करती है। अब बेबी की यही ख्वाहिश है कि वो अपनी किताबों से कमाए हुए पैसों से कोलकाता में एक घर बना सकें ताकि भविष्य में वो कभी कोलकाता वापस लौट सकें।