बम धमाके में कथित भूमिका के लिए मुकदमे का सामना कर रहे पूर्व छात्र नेता को असम के राज्यपाल ने स्नातकोत्तर परीक्षा में शीर्ष स्थान हासिल करने के लिए गुरुवार को दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक से सम्मानित किया। हालांकि, 71 प्रतिशत अंक लाने वाला विचाराधीन कैदी संजीब जेल में होने के कारण खुद इसे प्राप्त नहीं कर सका। इस मौके पर संजीब की बहन डॉली ने कहा कि यह हमारे लिए मिली-जुली अनुभूति है। जहां हम खुश हैं कि उसे स्वर्ण पदक मिला है, वहीं हमें इस बात का भी दुख है कि वह अभी भी सलाखों के पीछे है। हम जानते हैं कि वह निर्दोष है और उसे विश्वास है कि न्याय होगा।
29 वर्षीय संजीब तालुकदार, 15 मई, 2019 को गुवाहाटी के आरजी बरुआ रोड पर हुए बम विस्फोट के आरोपियों में शामिल है। मामले की जांच एनआईए कर रही है। एनआईए ने विशेष अदालत के समक्ष दायर अपने आरोप पत्र में, उस पर साजिश, गैरकानूनी गतिविधियों और मामले के मुख्य आरोपी को सहायता प्रदान करने का आरोप लगाया था। डॉली ने कहा कि उसका भाई, उन पांच भाई-बहनों में सबसे छोटा है। वह गौहाटी विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर छात्र संघ के अध्यक्ष थे, जहां गिरफ्तारी के समय वह वनस्पति विज्ञान में एमफिल कर रहा था।
डॉली ने कहा कि उसने जेल से प्रयोगशाला सुविधाओं तक पहुंच की कमी के कारण वह एमफिल पूरा नहीं कर सका। हमें उम्मीद है कि बाहर निकलने के बाद उन्हें इसे पूरा करने का समय मिलेगा। डॉली ने कहा कि जेल में रहने के बाद संजीब ने समाजशास्त्र को चुना क्योंकि यह एक ऐसा विषय था जिसे वह जेल में सीमित संसाधनों के साथ भी पढ़ने के लिए आश्वस्त थे। उनकी जमानत याचिका गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा चार महीने के समय में सुनवाई के लिए ली जानी है और परिवार उनके पक्ष में फैसला आने की उम्मीद कर रहा है।
वहीं, संजीब के दोस्त का कहना है कि अपने लेखन और वक्तव्यों के लिए साहित्यिक हलकों में जाने जाने के अलावा, उल्फा के साथ उसके संदिग्ध जुड़ाव की खबर हमारे लिए चौंकाने वाली थी।संजीब ने इग्नू से सर्टिफिकेट इन एचआईवी एंड फैमिली एजुकेशन (सीएएफई) और सर्टिफिकेट इन ह्यूमन राइट्स (सीएचआर) का कोर्स भी पूरा किया है। वह केकेएचएसओयू से भू-सूचना विज्ञान में स्नातकोत्तर प्रमाण-पत्र परीक्षा में भी शामिल हुआ, इनका परिणाम प्रतीक्षित है।