दो साल पहले जब तेजाब ने कविता के चेहरे से खुशियां छीनीं, तब उसे अंदाजा भी नहीं था कि एक दिन वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले तक पहुंचेगी। सर्जरी से लेकर अदालती कार्यवाही में उलझे उसके जीवन से परिवार ने भी नाता तोड़ लिया। ऐसे समय में किराए की छत के नीचे कविता ने अपने अंदर छिपे हुनर को निखारा। आज वह दिल्ली के प्रगति मैदान में गेट नंबर-7 के प्रवेश द्वार से थोड़ा आगे अपने स्टॉल ‘के-11’ में आत्मनिर्भर बनकर खड़ी है।
कविता के स्टॉल में क्विलिंग पेपर से बनीं आकर्षक ईयर रिंग्स और हेयर बैंड हैं। खास बात यह है कि उसने वीडियो देखकर ही इन्हें बनाना सीखा।
परिवार ने भी छोड़ दिया था साथ
कविता ने बताया, ‘17 जून 2012 को लखनऊ में हुए तेजाब हमले के बाद जिंदगी एकदम बदल गई। शुरुआत में परिवार ने इलाज करवाया, लेकिन जब मैंने आरोपी के खिलाफ केस का मन बनाया तो पापा पीछे हट गए। घर से निकाल देने की धमकी दी। तब दोस्त की मदद से कमरा किराए पर लिया और नए सिरे से जिंदगी शुरू की। करीब एक साल तक कविता अस्पताल और अदालत के चक्कर ही लगाती रही। जमा किए पैसे खत्म हो गए।
मदद को बढ़े हाथ
संकट के इस समय में कविता बंगलूरू की रहने वाली प्रज्ञा के संपर्क में आई। तेजाब पीड़िताओं की मदद करने वाली प्रज्ञा ने कविता को एक सीडी दी। उसमें क्विलिंग पेपर ज्वैलरी डिजाइन करने के वीडियो थे। इसे देखकर कविता ने ज्वैलरी बनाना सीख लिया। शुरुआत यूपी के बाराबंकी में नगर पालिका के मेले में स्टॉल लगाकर की। कविता ने बताया, ‘इस व्यापार मेले के जरिए अब तक करीब छह हजार रुपए की आमदनी हो चुकी है। आगे लखनऊ महोत्सव में जाना है।’
आप भी बढ़ाएं मदद का हाथ
जिनकी जिंदगी तेजाब-हमले के कारण पटरी से उतर गई, ऐसी कहानियां और भी हैं। अमर उजाला फाउंडेशन ने ऐसी महिलाओं के सशक्तीकरण की पहल शुरू की है। इसके लिए पांच लाख रुपये से अमर उजाला फाउंडेशन एसिड विक्टिम एम्पावरमेंट फंड बनाया है। आप भी इस मुहिम से जुड़ें। अगर आप किसी तेजाब पीड़ित को जानते हैं जिसे सहायता की जरूरत है, तो हमें बताएं। आप तेजाब पीड़ितों की मदद करना चाहें, तो - Amar Ujala Foundation या Acid Victim Empowerment Fund के नाम से चेक दे सकते हैं। हमारा पता है - Amar Ujala Foundation, C21/22, Sector 59, Noida - 201301। सहयोग राशि पर 80G के तहत टैक्स में छूट मिलेगी। संपर्क - मानस प्रकाश, 0120 - 4694250.