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Stray Dogs: स्टूडेंट्स फॉर स्ट्रीटीज की मांग, डॉग शेल्टर नहीं; ABC-ARV से हो कुत्तों की संख्या पर नियंत्रण

Sun, 14 Dec 2025 08:40 AM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Students for Streeties: कर्नाटक में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर एक छात्र संगठन ने सरकार से वैज्ञानिक और स्थायी समाधान अपनाने की मांग की है।
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आवारा कुत्ते - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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Stray Dogs: स्टूडेंट्स फॉर स्ट्रीटीज नाम का एक छात्र संगठन ने शनिवार को कर्नाटक सरकार से कहा कि कुत्तों के लिए बड़े-बड़े शेल्टर बनाने पर ज्यादा पैसा खर्च करने के बजाय, पूरे राज्य में ABC और ARV जैसे वैज्ञानिक कार्यक्रम चलाए जाएं, ताकि कुत्तों की संख्या को सही तरीके से नियंत्रित किया जा सके।

 

यह अपील यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई, जिसमें एनिमल वेलफेयर संगठनों और स्टूडेंट ग्रुप्स के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें ऑल पॉज़ कम्युनिटी, चार्लीज एनिमल रेस्क्यू सेंटर (CARE) और सिटिजन्स फॉर एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) शामिल थे।

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ABC-ARV और कम्युनिटी केयर से ही रेबीज पर काबू संभव

एक्ट्रेस पूजा गांधी ने एक वीडियो मैसेज के जरिए स्टूडेंट्स फॉर स्ट्रीटीज कैंपेन की तारीफ की और कर्नाटक सरकार से ABC प्रोग्राम को सख्ती से लागू करने की अपील की।
 
वक्ताओं ने कहा कि बेंगलुरु रेबीज हेल्पलाइन, रिंग वैक्सीनेशन और लगातार ABC प्रयासों जैसे मजबूत सिस्टम के कारण इंसानों में रेबीज़ से मुक्त रहा है। उन्होंने जोर दिया कि कम्युनिटी केयरगिविंग, मजबूत ABC और एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन (ARV) प्रोग्राम के साथ मिलकर, कुत्तों के काटने और रेबीज से निपटने का सबसे प्रभावी और मानवीय तरीका है।
 
पैनल ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के X पर हालिया पोस्ट का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने ABC नियम, 2023 का पालन करने और कुत्तों को पकड़ने से बचने की जरूरत को दोहराया था।
 
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ABC मॉडल को राज्यभर में लागू करने की मांग, शेल्टर खर्च पर उठाए सवाल

उन्होंने राज्य सरकार से कोर्ट में एक हलफनामा दायर करने की अपील की, जिसमें पूरे राज्य में ABC लागू करने और बेंगलुरु के प्रोग्राम की तर्ज पर एक मॉडल विकसित करने की बात कही गई हो।
 
उन्होंने यह भी कहा कि वे मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मुलाकात करेंगे, और सरकार से अपील करेंगे कि शेल्टर पर करोड़ों रुपये खर्च न करें और इसके बजाय साबित हो चुके ABC और ARV उपायों के जरिए लगभग दसवें हिस्से की लागत पर इस मुद्दे से निपटें।
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