इन बातों का रखें ख्याल
आयोग ने बताया कि परीक्षा में गड़बड़ी के अलग-अलग तरीके और उन्हें पकड़ने के लिए इस्तेमाल की जा रही तकनीकों में शामिल हैं:
- नोड का रिमोट कंट्रोल: किसी परीक्षा नोड को दूर से नियंत्रित करने की कोशिश का पता लगाने के लिए उन्नत तकनीकी समाधान लगाए गए हैं।
- रजिस्ट्रेशन स्तर पर प्रतिरूपण (इंपर्सोनेशन): आधार सत्यापन, बायोमैट्रिक और चेहरा पहचान (फेशियल रिकग्निशन) से ऐसे मामलों की पहचान की जा रही है।
- नोड आवंटन के बाद अदला-बदली: इस पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे और एआई एनालिटिक्स का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- पर्ची पास करना/अनुचित सहायता देना: परीक्षा हॉल में ऐसी गतिविधियों को पकड़ने के लिए सीसीटीवी कैमरे और एआई-आधारित एनालिटिक्स सक्रिय हैं।
एसएससी की एडवाइजरी में कहा गया है कि डिबार किए गए उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक की जा चुकी है और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आगे भी इसे प्रकाशित किया जाएगा।
आधार बायोमैट्रिक को लेकर दी ये हिदायत
इसके अलावा एसएससी ने उम्मीदवारों को सचेत किया कि परीक्षा के दौरान तकनीकी माध्यमों से यदि कोई गड़बड़ी पकड़ी जाती है तो हो सकता है कि परीक्षा के दौरान परीक्षक उसे बीच में न रोके, ताकि अन्य गंभीर और ईमानदारी से परीक्षा देने वाले छात्रों को परेशानी न हो। लेकिन बाद में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर ऐसे उम्मीदवारों के अंक रद्द कर दिए जाएंगे और उन्हें डिबार किया जाएगा।
आयोग ने परीक्षार्थियों को यह निर्देश दिए हैं:
- सभी प्रश्न एक साथ हल करने के इरादे से उत्तर पत्रक (रफ शीट) पर पहले लिखना और बाद में सिस्टम में दर्ज करना, “फास्ट आंसरिंग” माना जाएगा और इसे गड़बड़ी समझा जाएगा।
- परीक्षा के दौरान किसी अन्य परीक्षार्थी से बात करना या उनकी स्क्रीन देखना सख्त वर्जित है।
- आधार बायोमैट्रिक्स को लॉक न करें, क्योंकि विभिन्न चरणों पर बायोमैट्रिक सत्यापन अनिवार्य है।