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Ambedkar Jayanti: अंबेडकर जयंती पर दें ये आसान और प्रभावशाली भाषण, हर कोई करेगा तारीफ

Thu, 10 Apr 2025 08:36 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Speech Idea On Ambedkar Jayanti In Hindi: डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में भाषण प्रतियोगिताएं भी होती हैं। यहां उनके जीवन और आर्दशों पर आधारित एक प्रभावशाली भाषण दिया गया है।
 
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Speech Idea On Ambedkar Jayanti 2025 - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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Ambedkar Jayanti Speech Idea: बाबासाहेब के नाम से लोकप्रिय डॉ. भीमराव अंबेडकर भारतीय समाज के एक ऐसे महान व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपने विचारों और कार्यों से इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। वे न केवल संविधान निर्माता थे बल्कि एक दूरदर्शी विचारक, समाज सुधारक, विधिशास्त्र के ज्ञाता, कुशल अर्थशास्त्री, प्रखर वक्ता, पत्रकार और संपादक भी थे। हर साल 14 अप्रैल को देशभर में उनकी जयंती को सम्मानपूर्वक मनाया जाता है। इस दिन अनेक शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी कार्यालयों में अवकाश भी घोषित किया जाता है।

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इसके अलावा, उनकी जयंती पर कई कार्यक्रमों में भाषण प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाता है। अगर आपने भी किसी भाषण प्रतियोगिता में भाग लिया है, तो यहां डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन पर आधारित एक प्रभावशाली भाषण दिया गया है। आप इसके आधार पर अपना भाषण तैयार कर सकते हैं।

डॉ. भीमराव अंबेडकर के बारे में

डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के महू नगर में हुआ था। वे एक दलित समुदाय से थे, जिसे उस समय सामाजिक दृष्टि से छोटा समझा जाता था। उन्होंने जीवन भर सामाजिक असमानता और जातिगत भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया और समान अधिकारों की लड़ाई लड़ी। वे भारत रत्न से सम्मानित होने वाले महान विभूतियों में से एक हैं। उन्होंने समाज में दलितों और पिछड़ों के उत्थान के लिए अपना समर्पित जीवन खपा दिया। उनका विश्वास था कि हर व्यक्ति को समान अवसर मिलना चाहिए—चाहे वह किसी भी जाति, वर्ग या लिंग से संबंधित क्यों न हो।
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Speech Idea On Ambedkar Jayanti: अंबेडकर जयंती पर आसान और प्रभावशाली भाषण

डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर आप यहां दिया प्रभावशाली भाषण देकर कार्यक्रम में मौजूद लोगों के दिल पर गहरी छाप छोड़ सकते हैं।

नमस्कार/सुप्रभात,

यहां उपस्थित सभी सम्माननीय शिक्षकगण, आदरणीय अतिथियों, मंच पर विराजमान गणमान्य व्यक्तियों और मेरे प्रिय साथियों को मेरा सादर नमस्कार।

आज हम सब एक अत्यंत विशेष अवसर पर एकत्रित हुए हैं— भारत के संविधान निर्माता, सामाजिक क्रांति के अग्रदूत, महान विचारक और प्रेरणास्तंभ डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए।

बाबासाहेब, जैसा कि हम उन्हें स्नेहपूर्वक कहते हैं, सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं। वे समाज सुधारक थे, कुशल विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद, और पत्रकार भी। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन उन लोगों के अधिकारों के लिए समर्पित किया जिन्हें समाज ने लंबे समय तक नजरअंदाज किया।

साथियों, डॉ. अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के महू नामक स्थान पर हुआ था। वे एक ऐसे समुदाय से ताल्लुक रखते थे जिसे उस समय समाज में ‘अछूत’ कहा जाता था। लेकिन बाबासाहेब ने इस भेदभाव को चुनौती दी, शिक्षा को अपना हथियार बनाया, और न केवल खुद आगे बढ़े बल्कि पूरे दलित समुदाय को एक नई दिशा दी।

वे कहते थे— "शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो", इसी मंत्र के साथ उन्होंने दलितों, महिलाओं और श्रमिक वर्ग के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया।

साथियों, यह गर्व की बात है कि आज भारत का जो संविधान है, उसकी नींव बाबासाहेब ने रखी थी। उन्होंने स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री के रूप में कार्य किया और न्याय, समानता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों को कानून के रूप में स्थापित किया। इस योगदान के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

उन्होंने जातिवाद, छुआछूत और सामाजिक असमानता के विरुद्ध लड़ाई लड़ी। वे ऐसे धर्म में विश्वास करते थे जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाए। वे कहा करते थे—"मैं ऐसे धर्म को मानता हूं जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की शिक्षा देता है।"

बाबासाहेब ने बॉम्बे यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई की और 22 साल की उम्र में अमेरिका जाकर कोलंबिया यूनिवर्सिटी से एम.ए. और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने न केवल संविधान बनाया बल्कि 'मूकनायक', 'बहिष्कृत भारत' और 'जनता' जैसे अखबारों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया।

उन्होंने 1936 में लेबर पार्टी की स्थापना की और श्रमिकों के हित में कई कदम उठाए। श्रम सुधारों में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही है।

साथियों, अंबेडकर जयंती केवल एक जन्मतिथि नहीं है, यह एक संकल्प दिवस है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हम भी समाज में समानता, न्याय और समावेश के लिए काम करें।

आइए आज हम सभी यह प्रण लें कि हम डॉ. अंबेडकर के सिद्धांतों और आदर्शों को अपने जीवन में उतारेंगे। हम किसी भी प्रकार के भेदभाव का विरोध करेंगे और समाज को एक बेहतर दिशा देने में अपना योगदान देंगे।
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