SMC गठन को लेकर निर्देश
नई गाइडलाइंस के अनुसार, हर स्कूल में शैक्षणिक सत्र शुरू होने के एक महीने के भीतर एसएमसी का गठन करना अनिवार्य होगा। यह समिति लोकतांत्रिक, पारदर्शी और समावेशी तरीके से काम करेगी, ताकि सभी पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
हर महीने होगी बैठक
अब एसएमसी की बैठक कम से कम महीने में एक बार आयोजित करना जरूरी होगा। इसके लिए कम से कम 50 प्रतिशत सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य रखी गई है, जिससे लिए गए निर्णय प्रभावी और पारदर्शी हों।
स्कूल डेवलपमेंट प्लान पर जोर
गाइडलाइंस के तहत हर स्कूल को तीन साल की स्कूल डेवलपमेंट प्लान (SDP) तैयार करनी होगी। इस योजना को हर साल अपडेट किया जाएगा, ताकि स्कूल के विकास को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।
सब-कमेटी बनाने की सलाह
स्कूलों को अलग-अलग क्षेत्रों पर ध्यान देने के लिए उप-समितियां बनाने की सलाह दी गई है। इनमें अकादमिक और स्कूल भवन से जुड़ी समितियां शामिल हो सकती हैं, जो विशेष क्षेत्रों में सुधार के लिए काम करेंगी।
संसाधन जुटाने की जिम्मेदारी
एसएमसी को अब संसाधन जुटाने में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। इसके लिए अभिभावकों, पूर्व छात्रों, स्वयंसेवकों और स्थानीय संस्थाओं को जोड़ने पर जोर दिया गया है। CSR के माध्यम से भी सहयोग लिया जा सकता है।
सरकारी योजनाओं की निगरानी
समिति को समग्र शिक्षा, पीएम पोषण, उल्लास और पीएम श्री जैसी प्रमुख योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करनी होगी। इसके साथ ही छात्रावास और छात्र कल्याण से जुड़े कार्यों पर भी नजर रखनी होगी।
एनईपी 2020 के अनुरूप बदलाव
ये गाइडलाइंस राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार की गई हैं। इसका उद्देश्य बालवाटिका से कक्षा 12 तक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और छात्रों की उपस्थिति, शिक्षक भागीदारी और शैक्षणिक प्रदर्शन की बेहतर निगरानी करना है।
एसएमसी की संरचना
एसएमसी में अभिभावक, शिक्षक, स्थानीय प्रतिनिधि और शिक्षा विशेषज्ञ शामिल होंगे। समिति में सदस्यों की संख्या स्कूल में छात्रों की संख्या के आधार पर 12 से 25 के बीच होगी।
क्या होगा फायदा?
नई गाइडलाइंस से स्कूलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही, निर्णय लेते समय छात्रों के हितों को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे शिक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।