Shaurya Chakra: रक्षा क्षेत्र में देश की सेवा करने वाले वीरों को मिलने वाला शौर्य चक्र पुरस्कार चर्चा में है। मामला गुजरात से सामने आया है जहां शहीद सैनिक के परिवार ने कूरियर से भेजे गए शौर्य चक्र पुरस्कार को वापस लौटा दिया है। आखिर क्यों शहीद के माता-पिता शोर्य चक्र को वापस कर दिया? शौर्य चक्र दिया क्यों जाता है? क्या है इस पुरस्कार का इतिहास? आइए इस खबर में जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब...
शहीद लांस नायक गोपाल सिंह भदौरिया
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क्या है पूरा मामला?
शौर्य चक्र के चर्चा में आने के पीछे का कारण हैं गुजरात के अहमदाबाद शहर के निवासी शहीद लांस नायक गोपाल सिंह भदौरिया। साल 2017 में जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान राष्ट्रीय राइफल्स के लांस नायक गोपाल सिंह शहीद हो गए थे। साल 2011 से ही शहीद भदौरिया और उनकी पत्नी अलग रह रही थी। गोपाल सिंह शहीद हो गए तो 2018 में उन्हें शौर्य चक्र के लिए चुना गया। फिर 2018 के बाद दोनों परिवारों के बीच सुलह कराने की कोशिश की गई जो कि 2020 तक नहीं सुलझ पाया। फिर साल 2021 में शहीद की पत्नी और माता-पिता के बीच कोर्ट के जरिए एक समझौता करवाया गया। अदालत ने शहीद गोपाल सिंह को मरणोपरांत वीरता पुरस्कार और माता-पिता को पुरस्कार से जुड़े सभी लाभ देने का आदेश दिया। अदालत ने पेंशन, अनुग्रह भुगतान और केंद्र या राज्य सरकार या सेना से प्राप्त होने वाली सहायता सहित अन्य सभी सेवा लाभों को दोनों पक्षों के बीच 50-50 विभाजित कराया था।
शहीद गोपाल के के माता पिता।
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क्यों लौटाया गया शौर्य चक्र?
शहीद लांस नायक गोपाल सिंह भदौरिया (Lance Naik Gopal Singh Bhadoriya) के माता पिता ने कूरियर के जरिए पहुंचाए गए शौर्य चक्र को लौटा दिया है। उन्होंने कहा कि शहादत के सम्मान को कूरियर से भेजकर आपने हमारे शहीद बेटे का अपमान किया है इसलिए हम इसे वापस लौटा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार परिवार वाले अब राष्ट्रपति भवन जाएंगे और सबसे सामने राष्ट्रति के द्वारा सम्मानित करने की मांग करेंगे। परिवार वालों का कहना है कि उनके बेटे ने देश के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी और सरकार ने उसकी शहादत का ये सिला दिया है। उन्होंने कहा कि यह कोई गुप्त रखने की चीज थोड़ी है जो आप इसे चुपचाप दे रहे हैं। मेरे बेटे ने देश के लिए बलिदान दिया है इसलिए उसे देश के सामने ही सम्मान मिलना चाहिए।
Shaurya Chakra
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क्या है इस सम्मान का इतिहास?
26 जनवरी, 1950 को भारत सरकार द्वारा तीन वीरता पुरस्कार सम्मान की शुरुआत की गई थी। ये परम वीर चक्र, महावीर चक्र और वीर चक्र थे। इन सम्मानों को साल 1947 से ही प्रभावी माना गया था। इसके दो साल बाद 4 जनवरी, 1952 को अन्य तीन वीरता पुरस्कार का एलान किया गया। ये क्रमश: अशोक चक्र श्रेणी-I, अशोक चक्र श्रेणी-II और अशोक चक्र श्रेणी-III थे। इसके बाद साल 1967 में अशोक चक्र श्रेणी-I को अशोक चक्र, अशोक चक्र श्रेणी-II को कीर्ति चक्र और अशोक चक्र श्रेणी-III को शौर्य चक्र का नाम दिया गया।
Shaurya Chakra
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क्यों दिया जाता है शौर्य चक्र?
शौर्य चक्र भारत का शांति के समय वीरता का पदक (Gallantry Award) है। इसका मतलब है कि वैसा समय जब दुश्मन से सीधे युद्ध की स्थिति का न होना। शांति के समय मिलने वाले पदकों की श्रेणी में इसका तीसरा स्थान है। यह सम्मान सैनिकों, असैनिकों, सिविलियन्स को असाधारण वीरता या प्रकट शूरता या बलिदान, साहस और आत्म-बलिदान के कार्य के लिए दिया जाता है। यह मरणोपरान्त भी दिया जा सकता है। इस पुरस्कार को वर्ष में दो बार दिया जाता है। एक बार 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर और दूसरी बार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर। स्वयं राष्ट्रपति इस सम्मान को सौंपते हैं।
Shaurya Chakra
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कौन होता है इसे प्राप्त करने का पात्र?
शौर्य चक्र सेना, नौसेना और वायु सेना, किसी अन्य रिजर्व फोर्स, प्रादेशिक सेना, नागरिक सेना (Militia) और कानूनी रूप से गठित अन्य सेना के सभी रैंकों के अफसर और पुरूष और महिला सैनिकों को दिया जाता है। सशस्त्र सेना की नर्सिंग सेवा के सदस्य भी इसे प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा यह सम्मान सिविलियन नागरिक और पुलिस फोर्स, केन्द्रीय पैरा-मिलिट्री फोर्स और रेलवे सुरक्षा फोर्स के सदस्यों को भी उनकी वीरता या बलिदान के लिए दिया जाता है।
Gallantry awards
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क्या ऐसे और भी कोई सम्मान दिए जाते हैं?
जी हां, वीरता और बलिदान के लिए दिए जाने वाले सम्मान में शौर्य चक्र के अलावा भी पांच अन्य चक्र सम्मान शामिल हैं। इनकी वरीयता अनुसार सूची यह है-:
- परमवीर चक्र
- महावीर चक्र
- वीर चक्र
- अशोक चक्र
- कीर्ति चक्र
- शौर्य चक्र