शारदा ग्रुप के प्रतिष्ठित संस्थान हिन्दुस्तान कॉलेज ऑफ साइंस एंड टेक्नोलाजी में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में योगसाधक पंडित रामसिया दास, साध्वी हरिप्रिया अच्युत और बालयती रामदास बाल ब्रह्मचारी भी उपस्थित रहे। इस दौरान इन योग साधकों ने योग के लाभ और इसे करने की विधि के बारे में बेहद अहम जानकारियां साझा कीं।
कार्यक्रम की शुरुआत में कॉलेज के डायरेक्टर डॉक्टर राजीव कुमार उपाध्याय ने सभी अतिथियों को पुष्पमाला पहनाकर सम्मानित किया। इसके बाद पंडित रामसिया दास ने सभी को चौथे अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में दिव्य योग संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि योग विद्या भारतीय ऋषि मुनियों की मानव समाज को अनुपम देन है। पंडित रामसिया दास ने अष्टांग योग साधना के लिए लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति, आत्मिक आनंद और सुखमय जीवन योगपथ पर जीवन यात्रा के साथ संभव है।
उन्होंने कहा कि संपूर्ण मानवता के कल्याण के लिए योगधर्म अपनाना ही सबसे उत्तम है। ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत पर चलते हुए हमें जीवन सार्थक करना चाहिए। पंडित रामसिया दास ने अष्टांग योग के विभिन्न आचर पक्ष (यम, नियम), साधन पक्ष (धारणा, ध्यान समाधि) और साधन पक्ष (आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार) के बारे में बड़े ही आसान तरीके से समझाया। उन्होंने कहा कि योग पूर्ण विज्ञान है।
योग धर्म मत नहीं, पंथ नहीं यह एक मानव विज्ञान है, जिसमें मानव परम चेतना से मिलकर पूर्ण आनंद को प्राप्त होता है। कार्यक्रम में बालयती रामदास बाल ब्रह्मचारी ने योग क्रियाओं को उपस्थित जनों के सामने ऐसे पेश किया कि सब देखते ही रह गए। उन्होंने सूर्य नमस्कार से शुरुआत की और उसके बाद नियोली, वज्रासन, सिद्धासन, पवनमुक्तासन, सर्पासन, धर्नुासन, गौमुखआसन, मयूरासन, कुकुटासन, अर्द्धमत्स्यासन, माल्यासन, वाकासन, संकोर्णासन, सिद्धासन आदि प्रस्तुत किए।
योग दिवस पर आयोजित किए इस बेहद खास कार्यक्रम से पहले हिन्दुस्तान कॉलेज में डॉक्टर राजेश कहरवार के नेतृत्व में सुह प्रातः 6 बजे से 7 बजे शिक्षक और कर्मचारियों ने योग किया। अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर कॉलेज के निदेशक डॉक्टर राजीव कुमार उपाध्याय ने कहा कि योग समस्त बीमारियों का निदान है। विश्व योग दिवस का उद्देश्य है संपूर्ण विश्व में योग से प्राप्त होने वाले लाभ के प्रति लोगों को जागरूक करना। अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने योग परंपरा एवं सदैव सुखी रहने के गुरुमंत्र भी बताए। डॉक्टर उपाध्याय ने कहा कि पूरा विश्व योग दिवस मना रहा है, लेकिन हम पिछड़ गए हैं।
योग के शारीरिक मनोवैज्ञानिक एवं वैज्ञानिक लाभ बताते हुए उन्होंने कहा कि योग की शुरुआत भारत में पूर्व वैदिक काल में हुई मानी जाती है। योग हजारों साल से भारतीयों की जीवन शैली का हिस्सा रहा है। यह भारत की धरोहर है, लेकिन हम भारतीय ही आज अपनी इस कला को भूलते जा रहे हैं। योग में पूरी मानव जाति को एकजुट करने की शक्ति है। यह ज्ञान, कर्म और भक्ति का आदर्श मिश्रण है।