SFI ने यह घोषणा दिल्ली के एचकेएस सुरजीत भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में की। इस दौरान संगठन के राष्ट्रीय और राज्य स्तर के पदाधिकारियों ने देशभर में अभियान, प्रदर्शन और जनसभाएं आयोजित करने की योजना की जानकारी दी।
एक दशक में कितने सरकारी स्कूल हुए बंद?
SFI ने कहा है कि उसका कैंपेन अगस्त, सितंबर और अक्तूबर तक चलेगा, जिसमें कार्यकर्ता स्कूलों का दौरा करेंगे और उनकी हालत का ब्योरा तैयार करेंगे।
छात्र संगठन का दावा है कि पिछले दशक में 94,000 सरकारी स्कूल बंद हुए हैं, जबकि प्राइवेट स्कूलों की संख्या में 40,000 की बढ़ोतरी हुई है। संगठन का यह भी दावा है कि इस दौरान सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में 85.86 लाख की कमी आई है, जबकि प्राइवेट स्कूलों में 88.27 लाख छात्र बढ़े हैं।
SFI के मुताबिक, 1,00,843 स्कूलों में सिर्फ एक टीचर है जो लगभग 29 लाख छात्रों को पढ़ाते हैं, और देश भर के सरकारी स्कूलों में स्टाफ की भारी कमी है।
GDP का छह फीसदी शिक्षा पर खर्च करने की उठाई मांग
SFI ने एक बयान में कहा, "73% छात्र 12वीं कक्षा पूरी करने से पहले ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। स्कूल बंद होने से सबसे ज्यादा असर लड़कियों और दलित, आदिवासी व अल्पसंख्यक समुदायों के छात्रों पर पड़ रहा है।"
संगठन ने मांग की है कि सरकार शिक्षा में पब्लिक इन्वेस्टमेंट को GDP का छह प्रतिशत करे और सालाना बजट का 10 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा के लिए तय करे, जिसमें स्कूली शिक्षा पर ज्यादा जोर दिया जाए।
इसने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 को रद्द करने की भी मांग की है और आरोप लगाया है कि यह सरकारी स्कूलों को बंद करने और उनके विलय को बढ़ावा देती है।
SFI ने सभी बंद सरकारी स्कूलों को फिर से खोलने, स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और सभी विषयों के लिए ट्रेंड टीचरों की भर्ती करने की मांग की है, जिसमें स्टूडेंट-टीचर का अनुपात 1:20 हो।