फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिंदुस्तान कॉलेज ऑफ साइंस एंड टैक्नोलॉजी में कौशल विकास के संगोष्ठी

Tue, 21 Nov 2017 02:57 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला
विज्ञापन
विज्ञापन
हिन्दुस्तान कॉलेज ऑफ साइंस एण्ड टैक्नोलॉजी में इंस्टीट्यूट इंडस्ट्री इंटरफेस द्वारा छात्रों के लिए ‘‘एम्प्लॉयबिलिटी स्किलस्...... नीड ऑफ अॅवर’’ पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अतिथि व्याख्यान में मुख्य वक्ता के तौर पर श्री आर.के. चैहान जनरल मैनेजर एन.टी.पी.सी. लि. नोएडा एवं श्री शनि राजपाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैटर्नटैक, गुड़गांव द्वारा छात्रों को संबोधित किया गया। इस कार्यक्रम की शुरुआत में इंस्टीट्यूट इंडस्ट्री इंटरफेस के विभागाध्यक्ष द्वारा अतिथियों का परिचय छात्रों से कराया गया तथा अधिशासी निदेशक द्वारा अतिथियों को पुष्पगुच्छ भेंट कर एवं स्वागत भाषण दे कर किया गया।  
विज्ञापन


जब से मानवता का अस्तित्व माना गया है, तब ही से बेरोजगारी एक ज्वलंत मुद्दा रही है और प्रत्येक काल में इस मुद्दे का समाधान करने का प्रयत्न किया गया है। आज के समय में देखा गया है कि ज्ञान होते हुए भी छात्रों को रोजगार प्राप्त नहीं हो पा रहा। रोजगार की राह में सबसे बड़ी बाधा हैं हुनर का अभाव। असल में किताबी ज्ञान के अलावा जब तक छात्र के पास किसी भी क्षेत्र में हुनर नहीं है, उसे रोजगार मिल नहीं पाता। 

सेमिनार में एनटीपीसी के जनरल मैनेजर आर.के. चैहान ने कहा कि 1800 ई० के प्रारंभ में जब औद्योगिक क्रांति की आवश्यकता महसूस हुई, तब इस समस्या से निबटने के लिए जर्मनी, जापान, इटली, फ्रांस जैसे कई विकसित देशों ने अपनी बढ़ती औद्योगिक मांग को पूरा करने के लिए ऐसी शिक्षा प्रणाली को ग्रहण किया जो कौशल विकास केन्द्रित थी। इसके विपरीत ब्रिटेन ने भारत में एक ऐसी शिक्षा प्रणाली को अपनाया जो दो मुख्य बिन्दुओं पर आधारित थी, सम्प्रेषण और निर्देश ताकि वे अपने शासन स्वार्थों की पूर्ति कर सकें क्योंकि वे जानते थे कि अगर भारत पर नियंत्रण कायम रखना है और यहां के मानवीय संसाधन का प्रयोग करना है तो उन्हें यहां के लोगों के साथ किसी भाषा में सम्प्रेषण करना होगा और यही कारण है कि वर्तमान समय में अंग्रजी भाषा को हमारी प्रारंभिक शिक्षा में एक मुख्य विषय के रूप में समाहित किया गया। हालांकि यह भी भारत के लिए वरदान साबित हुआ। अंग्रेजी भाषा ने आज भारत को निर्देश प्रक्रिया आधारित बहिस्रोत का मुख्य गंतव्य स्थान बना दिया है।
विज्ञापन


बकौल श्री चैहान, दूसरा, ब्रिटेन को ऐसे लोगों की आवश्यकता थी, जो उनकी विकसित तकनीक को जान सकें तथा उसका प्रयोग संसाधनों का उपयोग करके उसका निर्यात कर सकें। लेकिन यहां पर भारतीयों के कौशल विकास की कहीं गुंजाइश नहीं थी। यही कारण है, आज का हमारा तकनीकी ज्ञान हमारी औद्योगिक आवश्यकताओं को पूरा करनें में असमर्थ है क्योंकि हमारे तकनीकी आवश्यकता के मध्य एक खाई है। हम अपनी शिक्षा प्रणाली को दोष देकर इस समस्या का समाधान नहीं कर सकते क्योंकि हमारी शिक्षा प्रणाली ने भी हमें इंजीनियर, डाक्टर, वैज्ञानिक दिये हैं लेकिन अपेक्षाकृत धीमी रफ्तार से। सैटर्न टेक इस दिशा में अपनी राष्ट्रीय कर्तव्य का पालन करने का प्रयास कर रहा है। 

सैटर्न टेक के चेयरपर्सन सनी राजपाल ने कहा कि छात्र जब बी.टेक की डिग्री ले  कर कॉलेज से बाहर निकलता है तो उनके पास किताबी ज्ञान तो होता है लेकिन इंडस्ट्री को किस ज्ञान या कौशल की आवश्यकता है, उसका ज्ञान नहीं है। इसी गैप को पूरा करने के लिए सैटर्न टेक विश्वविधालय एवं इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों के कौशल विकास के लिए इस क्षेत्र की विभिन्न शाखाओं में ज्ञान आधारित प्रशिक्षण के लिए भी प्रयत्नशील है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को वास्तविक औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए तैयार करना है और विश्वविधालय छात्र और औद्योगिक संस्था में एक प्रणाली का निर्माण करना है जिससे छात्र जब कॉलेज से शिक्षा पूर्ण कर बाहर आये तो उसे किताबी ज्ञान के साथ इन्डस्ट्री का भी पूर्ण अनुभव हो जिससे उसे रोजगार मिलने में कोई कठिनाई न हो। 

कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। इस कार्यक्रम का संचालन तृतीय वर्ष के छात्र श्री अक्षय रावल तथा सुश्री साक्षी बंसल द्वारा किया गया। कार्यक्रम में 400 से अधिक तृतीय वर्ष के छात्र एवं फैकल्टी सदस्य उपस्थित थे। कार्यक्रम काॅलेज के अधिषासी  निदेषक प्रो0  वी0के0  शर्मा के दिषा निर्देष में किया गया।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें