एक्स्ट्रेक्टिव मेटलर्जी तकनीक का उपयोग
अधिकारियों ने बताया कि स्टार्टअप के द्वारा स्टील मिल के कचरे को उच्च लौह सामग्री के साथ धातु में ट्रिम करने के लिए स्वच्छ दहन तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। आगे जाकर इसे जहाज निर्माण, स्टोन क्रशिंग प्लांट, तेल और गैस संयंत्र और बिजली संयंत्र जैसे उद्योगों द्वारा दोबारा प्रयोग में लाया जा सकता है। संदीप गुप्ता ने पीटीआई से बताया कि हम एक्स्ट्रेक्टिव मेटलर्जी तकनीक का उपयोग करके एक सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल पर काम कर रहे हैं। इसके माध्यम से ग्रीनहाउस गैसों को कम किया जा सकेगा और एक स्थायी कचरा प्रबंधन प्रक्रिया लागू की जा सकेगी।
तकनीक शत प्रतिशत प्रतिशत प्रदूषण मुक्त
संदीप ने आगे बताया कि इस प्रक्रिया में कम ऊर्जा का प्रयोग होता है। भट्टी और बिजली का प्रयोग न करने के कारण यह तकनीक शत प्रतिशत प्रतिशत प्रदूषण मुक्त है। इससे कम से कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन होता है। इस कचरे को अन्य धातुओं के साथ में मिलाकर कई उपयोगी चीजे बनाई जा सकती है। ग्रीन ट्रेक ने हिमाचल प्रदेश में एक स्थायी संयंत्र स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए हैं। इसके तहत अल्ट्राटेक, एसीसी और अंबुजा सीमेंट जैसी प्रमुख कंपनियों को मदद दी जाएगी। सरकार की ओर से भी इसमें मदद दी जाएगी।
युवा कर सकते हैं तकनीक का इस्तेमाल
वर्तमान समय में देश के युवा सरकारी या प्राइवेट नौकरी के बजाय स्वरोजगार की ओर ध्यान देने लगे हैं। ऐसे में यह तकनीक उन युवाओं के लिए भी एक मार्गदर्शन का काम कर सकती है। देश के युवा ऐसी तकनीक या नवाचार के माध्यम से रोजगार मांगने के बजाय रोजगार पैदा करने की ओर अग्रसर हो सकते हैं।