याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा, "अगर बच्चे को अधिकारों की जानकारी नहीं है, तो उन अधिकारों का कोई मतलब नहीं है।" दिल्ली निवासी गीता रानी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि संविधान द्वारा गारंटीकृत अपने मौलिक अधिकारों का दावा करने और उनकी रक्षा करने के लिए प्रत्येक नागरिक के लिए बुनियादी कानूनों को समझना आवश्यक है।
अधिवक्ता रीपक कंसल के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है, "इसलिए, शैक्षणिक पाठ्यक्रम में बुनियादी कानूनी शिक्षा को शामिल करना और स्कूल स्तर पर आत्मरक्षा प्रशिक्षण को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चे किसी भी अदृश्य दुश्मन के मामले में खुद की रक्षा कर सकें।"
इसमें कहा गया है कि "भारत में अपराध 2022" शीर्षक वाली एनसीआरबी रिपोर्ट में 2022 में बच्चों के खिलाफ अपराध के 1.62 लाख मामले दर्ज किए गए हैं, जो 2021 की तुलना में 8.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि कानूनी शिक्षा और आत्मरक्षा शिक्षा अपराध को रोकने और बच्चों को हिंसा से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसमें कहा गया है, "स्कूलों में इन विषयों को अनिवार्य बनाने से उनकी सुरक्षा और कल्याण में काफी वृद्धि हो सकती है।"
याचिका में रेखांकित किया गया है कि बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के हस्ताक्षरकर्ता के रूप में, भारत बच्चों को सभी प्रकार की हिंसा और दुर्व्यवहार से बचाने के लिए बाध्य है।
याचिका में आगे कहा गया है कि कई घटनाओं में पीड़ित, मुख्य रूप से बच्चे, आत्मरक्षा कौशल की कमी के कारण खुद का बचाव नहीं कर सके और कहा कि सीबीएसई ने 2013 में ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के छात्रों के लिए अनिवार्य विषय के बजाय एक वैकल्पिक विषय के रूप में कानूनी अध्ययन शुरू किया था, लेकिन इसे लागू किया जाना बाकी है।
याचिका में कहा गया है, "हमारे देश में कई शैक्षिक बोर्ड हैं, जिन्हें बच्चों की सुरक्षा और कल्याण के लिए स्कूल स्तर पर कानूनी शिक्षा और आत्मरक्षा प्रशिक्षण शुरू करने का निर्देश दिया गया है, ताकि उन्हें अपने स्कूली पाठ्यक्रम में अनिवार्य विषयों के रूप में शामिल किया जा सके।"
इसमें कहा गया है कि कानूनी साक्षरता अधिकारों की समझ को बढ़ाएगी, बच्चों को अवैध गतिविधियों से बचने और जब भी ज़रूरत हो सहायता लेने में मदद करेगी।
याचिका में कहा गया है, "यह छात्रों, विशेष रूप से लड़कियों को खुद की रक्षा करना सिखाकर और उनका आत्मविश्वास बढ़ाकर उन्हें सशक्त बनाएगा। इससे जागरूकता बढ़ेगी और दुर्व्यवहार की रिपोर्टिंग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे समग्र सुरक्षा में सुधार होगा।"