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SC: बढ़ते छात्र आत्महत्या मामलों की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठित; आठ महीने में सौंपेगी रिपोर्ट

Mon, 24 Mar 2025 05:18 PM IST
आकाश कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

National Task Force: सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ती छात्र आत्महत्याओं पर चिंता जताते हुए राष्ट्रीय टास्क फोर्स (NTF) का गठन किया। यह टास्क फोर्स आत्महत्याओं के कारणों की जांच करेगी, सुरक्षा उपाय सुझाएगी और जरूरत पड़ने पर संस्थानों का निरीक्षण करेगी।
 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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Student Suicides: सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षण संस्थानों में बार-बार हो रही छात्र आत्महत्याओं पर चिंता जताई और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को हल करने और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स (NTF) का गठन किया।

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न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और आर महादेवन की पीठ ने दिल्ली पुलिस को आदेश दिया कि वे 2023 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), दिल्ली में पढ़ रहे दो छात्रों की आत्महत्या के मामले में उनके परिवारों की शिकायतों पर एफआईआर दर्ज करें।

मौजूदा कानूनी और संस्थागत व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं: सुप्रीम कोर्ट

अदालत ने कहा कि देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में आत्महत्याओं का "चिंताजनक पैटर्न" देखने को मिल रहा है। ये घटनाएं यह दिखाती हैं कि मौजूदा कानूनी और संस्थागत व्यवस्थाएं छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित करने और आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, पूर्व न्यायाधीश एस रविंद्र भट NTF के अध्यक्ष होंगे। इसके अलावा, राज्यों के उच्च शिक्षा विभागों, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, विधि विभाग और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव इसके पदेन सदस्य होंगे।

चार महीने में अंतरिम रिपोर्ट पेश करेगी टास्क फोर्स

अदालत ने कहा कि यह टास्क फोर्स आत्महत्याओं के प्रमुख कारणों की पहचान करेगी, मौजूदा नियमों का विश्लेषण करेगी और सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के सुझाव देगी।

टास्क फोर्स को यह अधिकार होगा कि वह देश के किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान में अचानक निरीक्षण कर सके। इसके अलावा, यदि आवश्यक हुआ, तो टास्क फोर्स अतिरिक्त सिफारिशें भी दे सकती है ताकि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को व्यापक रूप से हल किया जा सके और आत्महत्याओं की घटनाओं को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

अदालत ने कहा कि यह टास्क फोर्स चार महीने में एक अंतरिम रिपोर्ट और आठ महीने के भीतर एक अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

जनवरी 2024 में क्या हुआ था?

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उन दो छात्रों के माता-पिता द्वारा दायर अपील पर आया, जिनकी आत्महत्या के मामलों में दिल्ली उच्च न्यायालय ने जनवरी 2024 में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने से इनकार कर दिया था।

इनमें से एक, अयुष अश्ना, 8 जुलाई 2023 को अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे, जबकि अनिल कुमार का शव 1 सितंबर 2023 को उनके हॉस्टल रूम में मिला था। आरोप था कि दोनों छात्र अनुसूचित जाति से थे और उन्होंने अपने माता-पिता को पहले ही जातीय भेदभाव का सामना करने की जानकारी दी थी।

अदालत ने पाया कि पुलिस ने किसी न किसी कारणवश शिकायतों पर एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने कहा कि यह मामला केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि उन सभी माता-पिता और शिक्षण संस्थानों के लिए भी एक आंखें खोलने वाला मामला है, जिनके बच्चे हॉस्टल में रहते हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि आत्महत्या के ये मामले अकेली घटनाएं नहीं हैं, बल्कि यह समस्या लंबे समय से चल रही है। इनका कारण रैगिंग, पढ़ाई का दबाव, जातीय भेदभाव और यौन उत्पीड़न जैसे कई कारक हो सकते हैं।
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2018 से 2023 तक 98 छात्रों ने की आत्महत्या: केंद्र सरकार

केंद्र सरकार द्वारा 2023 में राज्यसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 2018 से 2023 के बीच उच्च शिक्षण संस्थानों में 98 छात्रों ने आत्महत्या की। इनमें से 39 आईआईटी से, 25 एनआईटी से, 25 केंद्रीय विश्वविद्यालयों से, 4 आईआईएम से, 3 आईआईएसईआर से और 2 आईआईआईटी से थे।

अपील पर सुनवाई के दौरान, अदालत ने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 174 का उल्लेख किया, जो आत्महत्या जैसे मामलों में पुलिस जांच और रिपोर्ट दर्ज करने से संबंधित है।

अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस को संज्ञेय अपराध की जानकारी देता है, तो पुलिस को धारा 154 के तहत तुरंत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करनी चाहिए।

इस मामले में, पीड़ितों के परिवारों ने 21 जुलाई 2023 और 9 सितंबर 2023 को अपने क्षेत्रीय पुलिस थानों में शिकायतें दर्ज करवाई थीं, जिसमें उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत अपराध की शिकायत की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस को इस मामले को हल्के में नहीं लेना चाहिए, सिर्फ इसलिए कि यह घटना एक प्रतिष्ठित संस्थान जैसे कि आईआईटी दिल्ली के हॉस्टल में हुई थी।

अदालत ने दक्षिण-पश्चिम जिला के डीसीपी को आदेश दिया कि वे शिकायतों के आधार पर एफआईआर दर्ज करें और मामले की जांच के लिए एक एसीपी रैंक के अधिकारी को नियुक्त करें
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