पात्रता मानदंड मनमाने तरीके से बदलने का आरोप
वकील संजीत कुमार त्रिवेदी के माध्यम से दायर नई याचिका में कहा गया है कि यह प्रतिष्ठित आईआईटी में प्रवेश की प्रक्रिया से संबंधित है, लेकिन जेईई-एडवांस्ड परीक्षा आयोजित करने के लिए नियुक्त संयुक्त प्रवेश बोर्ड (जेएबी) ने छात्रों के लिए पात्रता मानदंड को "मनमाने" तरीके से बदल दिया।
याचिका में क्या कहा गया है?
याचिका में कहा गया है, "जेएबी ने 5 नवंबर, 2024 की अपनी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से पहले जेईई-एडवांस्ड के लिए प्रयासों की संख्या तीन निर्धारित की, लेकिन 18 नवंबर, 2024 की एक अन्य प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से इसे अचानक बदल दिया और इस तरह प्रयासों की संख्या घटाकर दो कर दी। पात्रता मानदंड में अचानक किए गए बदलावों ने याचिकाकर्ता के साथ-साथ हजारों ऐसे ही लोगों को प्रभावित किया है, जो आईआईटी में प्रवेश पाने के मूल्यवान अवसर से वंचित हैं।"
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याचिका में यह भी कहा गया है कि पात्रता मानदंड में बदलाव प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। इसमें कहा गया है, "आक्षेपित अधिसूचना वैध अपेक्षा और वचनबद्ध रोक के सिद्धांतों का भी उल्लंघन करती है।"
18 नवंबर, 2024 की प्रेस विज्ञप्ति को रद्द करने की मांग
याचिका में 18 नवंबर, 2024 की प्रेस विज्ञप्ति को रद्द करने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि इस बदलाव ने कई छात्रों को जेईई-एडवांस्ड 2025 परीक्षा देने से वंचित और अयोग्य बना दिया है।