असिस्टेंट प्रोफेसर रवि प्रकाश मौर्य का कहना है कि कृषि क्षेत्र जितना बड़ा है, उतना ही इस क्षेत्र में जॉब के अवसर भी हैं, जो छात्र-छात्राएं कृषि क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं उनके लिए संस्कृति यूनिवर्सिटी में जरूरी डिग्री के साथ ही प्रशिक्षण के लिए कृषि फार्म भी उपलब्ध है।
संस्कृति यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति सचिन गुप्ता का कहना है कि वर्तमान समय में मौसम का मिजाज बदल रहा है, फलस्वरूप फसल चक्र में भी बदलाव हुआ है। बढ़ती जनसंख्या के कारण खेती पर दबाव है और किसानों के सामने अधिक उत्पादन की चुनौतियां भी हैं, इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए संस्कृति यूनिवर्सिटी ने कृषि संकाय को प्रमुखता दी है। हमारा प्रयास है कि यहां न सिर्फ छात्र-छात्राएं कृषि की नई तकनीक और अनुसंधानों से परिचित हों बल्कि जनपद मथुरा और उसके आसपास के किसानों को भी इसका लाभ मिले।
संस्कृति यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉक्टर राणा सिंह का कहना है संस्कृति यूनिवर्सिटी में कृषि विज्ञान के स्नातक स्तर के कोर्स में बदलाव कर इसे अब व्यावहारिक अनुभव के साथ व्यावसायिक और रोजगारोन्मुख भी बनाया जा रहा है। नये पाठ्यक्रम में पारम्परिक कृषि कोर्स, प्रौद्योगिकी कोर्स, प्रतिभा उन्नति कोर्स एवं कृषि व्यापारिक कोर्स का भी समावेश किया गया है।
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