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चिकित्सा क्षेत्र में युवाओं की पहली पसंद बना संस्कृति विश्वविद्यालय

Mon, 14 Aug 2017 07:39 PM IST
amarujala.com
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संस्कृति विश्वविद्यालय
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“चिकित्सा क्षेत्र” युवाओं में सर्वोत्तम, प्रतिष्ठित और सम्मानित पेशेवर क्षेत्रों में से एक है। विज्ञान और जीव विज्ञान विषय में 12वीं के बाद चिकित्सा क्षेत्र में कई पाठ्यक्रम युवाओं की पसंद में शामिल हो चुके है। चिकित्सा पद्धति में सफेद कोट, दवाओं, योगों, रोगों, निदान, मानव सेवा, औषधीय अनुसंधान आदि क्षेत्र में रूचि रखने वाले युवाआों के लिए मेडिकल क्षेत्र में शैक्षणिक शिक्षा की एक विस्तृत श्रंखला मौजूद है। 
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अपने क्षेत्र के युवाओं के लिए संस्कृति में चिकित्सा पेशेवरों के लिए बीएचएमएस, बीएएमएस, बीपीटी, बीयूएमएस, डीएचपी, बीएमएलटी और कई ऐसे बूस्टर कोर्स उपलब्ध हैं, जो सिर्फ चिकित्सा पाठ्यक्रम ही नहीं देते बल्कि औषधि अस्पताल, अनुसंधान प्रयोगशालाओं और संबंधित क्षेत्र में इंटर्नशिप भी उपलब्ध कराते है। संस्कृति विश्वविद्यालय में शामिल चिकित्सा कोर्स रोजगारपरक होने के साथ-साथ आगामी भविष्य के कैरियर के लिए एक बहुत अच्छे विकल्प हैं।

प्रो. चांसलर राजेश गुप्ता ने कहा कि मेडिकल कोर्स के अंतर्गत आने वाले कोर्सों के लिए संस्कृति विश्वविद्यालय अपनी प्रवेश परीक्षा का आयोजन करता है। स्नातक डिग्री कोर्स में प्रवेश लेने के लिए, छात्रों को 12वीं विज्ञान एवं जीव विज्ञान विषय से उत्तीर्ण होना जरूरी है। रोज नित नई पनपतीं बीमारियों को देखते हुए युवाओं में मेडिकल पाठ्यक्रम की मांग तेजी से बढ़ रही है। वैसे भी मेडिकल प्रोफेशन मेहनती एवं प्रतिष्ठित क्षेत्रों में से एक है। 
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चिकित्सा क्षेत्र में मेहनत की माना जाए तो चिकित्सकों के लिए रोगियों की सेवा के लिए चैबीस घंटे-सातों दिन उपस्थित रहना अत्यंत आवश्यक होता है। चिकित्सा में कैरियर को अपनी शिक्षा के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों में विभाजित किया जा सकता है फिर चाहें आपके पास डिप्लोमा, स्नातक डिग्री या लैब टेक्नीशियन डिग्री है तब भी आप सिर्फ कैरियर की दौड़ में ही शामिल होते हैं जब तक कि संबंधित क्षेत्र में प्रोफेशन को हासिल नहीं कर लेते। 

संस्कृति विश्वविद्यालय में चिकित्सा क्षेत्र के कई पाठ्यक्रम उपलबद्ध

संस्कृति विश्वविद्यालय
चिकित्सा पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद स्वास्थ्य संगठन, क्लीनिक या सही अस्पताल चुन सकते हैं। संस्कृति विश्वविद्यालय चिकित्सा क्षेत्र में कई पाठ्यक्रम युवाओं के लिए प्रदान करता है जिनकी एक लंबी श्रृंखला मौजूद है।

जनरल मैनेजर साइबल चटर्जी ने बताया कि बीएचएमएस (बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी) साढ़े पांच साल का पाठ्यक्रम है जो होम्यापैथिक शिक्षा में स्नातक डिग्री प्रदान करता है। जिसके लिए 12वीं फिजिक्स, कैमिस्ट्री एवं रसायन विज्ञान से 50 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इस कोर्स के अंतर्गत रोगों और होम्योपैथिक दवाओं की उपचारात्मक विधि को समझाया जाता है। साढ़े पांच वर्षीय इस कोर्स में एक वर्षीय इंटर्नशिप पर छात्रों को भेजा जाता है।

आयुर्वेदिक में रूचि रखने वाले युवाओं के लिए बीएएमएस (बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी) चिकित्सा क्षेत्र में आयुर्वेदिक प्रणाली में स्नातक की डिग्री है। जो आयुर्वेदिक शिक्षा भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद द्वारा विनियमित साढ़े पांच वर्ष का कोर्स है। कफ, पित्त एवं वात आदि रोगों में आयुर्वेदिक औषधि रामवाण औषधि सिद्ध होती हैं। 

फिजियोथेरेपी में अस्थायी विकलांग लोगों के पुनर्वास में मददशाली बैचलर इन फिजियोथेरेपी एवं मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी कोर्स हैं। जिनमें, बैचलर इन फिजियोथेरेपी साढ़े चार वर्षीय कोर्स है। जिसके लिए उम्मीदवार को 12वीं में भौतिक, रसायन और जीवविज्ञान में 50 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। मास्टर ऑफ फिजियोथेरेपी द्विवर्षीय कोर्स है जिसमें  50 प्रतिशत अंकों के साथ बैचलर इन फिजियोथेरेपी आवश्यक है। इस कोर्स में छः महीने की इंटरर्नशिप के साथ विभिन्न सेमिनारों और कार्यशालाओं का भी आयोजन किया जाता है।

चिकित्सा क्षेत्र में यूनानी चिकित्सा (बैचलर इन यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी) भी इस समय युवाओं की पसंद बन रहा है जिसके अंतर्गत जड़ी बूटियों यानि यूनानी तकनीक से चिकित्सा की जाती है। यूनानी चिकित्सा किडनी स्टोन, वजन का तेजी से बढ़ना-घटना, डाइबिटीज आदि रोगों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यूनानी चिकित्सा में स्नातक के  लिए बारहवीं भौतिक, रसायन एवं जीवविज्ञान में 50 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। साढ़े पांच वर्षीय इस कोर्स में एक वर्षीय इंटरर्नशिप आवश्यक है। यूनानी में बैचलर डिग्री के लिए उर्दू से दसवीं एवं समकक्ष शिक्षा अनिवार्य है इसकी खास वजह यह है कि यूनानी की पढ़ाई उर्दू में होती है। उम्मीदवार को प्रवेश के लिए कम से कम 17 वर्ष का होना अनिवार्य है।
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संस्कृति विश्वविद्यालय शैक्षिक जगत के उच्चतम मापदण्डों के अनुरूप

संस्कृति विश्वविद्यालय
संस्कृति विश्वविद्यालय में सबसे कम समय में चिकित्सा क्षेत्र का कोर्स डिप्लोमा इन होम्योपैथी फार्मेसी कोर्स है, जो कि होम्योपैथिक दवाओं के फार्मेसी में मेडिकल द्विवर्षीय डिप्लोमा कोर्स है। इसके लिए उम्मीदवार को भौतिक, रसायन, जीवविज्ञान अथवा गणित से 12वीं 50 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। जिन युवाओं की रूचि लैब और परीक्षण करने में हैं उनके लिए बीएमएलटी (बैचलर ऑफ मेडिकल लैब टेक्नीशियन ) मेडिकल लैब टेक्नीशियन के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले कोर्स में से एक है। 

इस कोर्स के जरिए चिकित्सा प्रणाली के अंतर्गत आने वाले जांच परीक्षणों को मेडिकल लैब में होने वाले परीक्षणों का प्रशिक्षण दिया जाता है यह चिकित्सा प्रयोगशाला प्रौद्योगिकी की स्नातक डिग्री है। उम्मीदवार को फिजिक्स, कैमिस्ट्री, मैथ अथवा जीवविज्ञान विषय से 50 प्रतिशत अंको से उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।

चांसलर सचिन गुप्ता ने कहा कि छात्रों के लिए उन्हीं खास रोजगारपरक कोर्सों को संस्कृति विश्वविद्यालय ने पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है, जो इस समय चिकित्सा क्षेत्र में मांग में हैं। इन कोर्सों में डिग्री कोर्स से लेकर मेडिकल लैब टैक्नीशियन कोर्स तक मौजूद है। जिनकी मेडिकल उद्योग, स्वास्थ्य संगठन, औषधि अस्पताल, अनुसंधान प्रयोगशालाएं और चिकित्सा संबंधित क्षेत्र में मांग और आवश्यकता हैं।

संस्कृति विश्वविद्यालय यूनानी, होम्यापैथिक, आयुर्वेदिक, मेडिकल प्रयोगशालाओं, संकाय सदस्यों, उचित मार्गदर्शकों से सुसज्जित होने के साथ साथ अपने क्षेत्र के मरीजों को चिकित्सा सेवाएं देने में अग्रणी है। संस्कृति विश्वविद्यालय शैक्षिक जगत के उच्चतम मापदण्डों के अनुरूप, छात्र-छात्राओं के समग्र विकास के साथ, व्यवसायपरक शिक्षण-प्रशिक्षण के लिए कटिबद्ध है। ’’वसुधैव कुटुम्बकम’’ सार्वभौमिक मूल्यों पर आधारित व्यवसाय निपुण, जीवन में उत्कृष्टता लाते हुए, रोजगारपरक शिक्षा, विश्वविद्यालय का परम उद्देश्य है।
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