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संस्कृति यूनिवर्सिटी की छात्राओं के लिए सरप्राइज लेकर आया 2019 

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मथुरा। संस्कृति यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ फैशन डिजाइनिंग के पांच छात्र-छात्राओं के लिए साल 2018 का अंतिम दिन बेहद खास रहा। या यूं कहें कि 2019 उनके लिए सरप्राइज लेकर आया। 31 दिसंबर के
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दिन गुरुग्राम की हाउस ऑफ स्पैरो और नोएडा की गिन्नी फिलामेंट लिमिटेड कंपनियों के पदाधिकारियों ने संस्कृति यूनिवर्सिटी की स्कूल ऑफ फैशन डिजाइनिंग की छात्रा नवनी अग्रवाल, मोनिका अत्री, प्रियंका सिंह, याशिका वार्ष्णेय और छात्र शशांक शर्मा को फैशन डिजाइनर के पद पर नियुक्ति पत्र प्रदान किए। मतलब 2019 शुरू होने से ठीक एक दिन पहले ही छात्र-छात्राओं जिंदगी बदल गई और नए साल में
इन्होंने नई पहचान के साथ प्रवेश किया।   इस सफलता से छात्र-छात्राएं ही नहीं, उनके अभिभावकों और टीचर्स को भी बेहद खुशी हुई। छात्राओं ने फैशन डिजाइनर बनने पर कहा कि संस्कृति यूनिवर्सिटी में पढ़ाई पूरी करने से पहले किसी बड़ी कंपनी में सेवा का अवसर मिलना उनके लिए सुनहरे भविष्य का संकेत है। उत्तर प्रदेश टॉप यूनिवर्सिटीज में शुमार मथुरा की संस्कृति यूनिवर्सिटी का स्कूल ऑफ फैशन डिजाइनिंग डिपार्टमेंट उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के चलते युवाओं की पहली पसंद बनता जा रहा है। आज के समय में फैशन डिजाइनिंग में करियर के अच्छे अवसर हैं और इसी बात को ध्यान में रखते हुए संस्कृति यूनिवर्सिटी में छात्र-छात्राओं को समय की मांग
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के हिसाब से शिक्षा दी जा रही है। साल 2018 में आधे से ज्यादा छात्र-छात्राओं को किसी न किसी बड़ी कंपनी में सेवा का अवसर मिला। 
31 दिसंबर 2018 को गुरुग्राम की हाउस ऑफ स्पैरो कम्पनी ने बीए फैशन डिजाइनिंग की छात्रा नवनी अग्रवाल, मोनिका अत्री, शशांक शर्मा तथा डिप्लोमा फैशन डिजाइनिंग की प्रियंका सिंह को फैशन डिजाइनर पद पर नियुक्ति पत्र प्रदान किए, वहीं नोएडा की गिन्नी फिलामेंट लिमिटेड कंपनी ने याशिका वार्ष्णेय को अपने यहां इसी पद पर सेवा का अवसर दिया। एक साथ पांच छात्र-छात्राओं की इस सफलता पर प्रिंसिपल अंजलि भारद्वाज का कहना है कि फैशन डिजाइनिंग की पहली योग्यता क्रिएटिविटी है। फैशन डिजाइनिंग के छात्र-छात्राओं को रंगों और डिजाइन के साथ हमेशा कुछ न कुछ नया प्रयोग करना  होता है। इतना ही नहीं, उनमें क्रिएटिविटी के साथ अच्छे कम्युनिकेशन स्किल्स भी होने चाहिए। उन्हें फैशन जगत से न केवल रू-ब-रू रहना होता है बल्कि लेटेस्ट ट्रेंड की भी जानकारी रखनी होती है।  अंजलि भारद्वाज ने बताया कि संस्कृति यूनिवर्सिटी में बैचलर इन फैशन डिजाइनिंग, डिप्लोमा इन फैशन डिजाइनिंग, मास्टर इन फैशन डिजाइनिंग जैसे कोर्स छात्र-छात्राओं के लिए उपलब्ध हैं।  कुलाधिपति सचिन गुप्ता का कहना है कि संस्कृति यूनिवर्सिटी के शैक्षिक पाठ्यक्रमों में मॉडर्न  टेक्नीक और प्रोसेस को समाहित किया गया है। संस्कृति यूनिवर्सिटी में शिक्षा के क्षेत्र में आने वाले 20 सालों में होने वाले बदलावों को ध्यान में रखते हुए प्रभावी नीति अपनाई जा रही है, जिससे छात्र-छात्राएं मौजूदा समय की चुनौतियों और भविष्य के लक्ष्य के लिए खुद को तैयार कर पा रहे हैं। यही वजह है कि संस्कृति यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स कैंपस से निकलने के बाद बड़ी-बड़ी कंपनियों में अपने टैलेंट का लोहा मनवा रहे हैं।  उपकुलाधिपति राजेश गुप्ता का कहना है कि संस्कृति यूनिवर्सिटी का व्यावसायिक एजेंसियों से सीधा= अनुबंध है। संस्कृति यूनिवर्सिटी ने समय के साथ चलने और इसके लिए जरूरी उपायों को करने में तत्परता एवं अभिरुचि दिखाई है। शिक्षा को लेकर हमारी सोच इन्हीं पहलुओं पर केंद्रित है। इस सफलता के लिए कुलाधिपति सचिन गुप्ता, उप-कुलाधिपति राजेश गुप्ता, कार्यवाहक निदेशक पीसी छाबड़ा, कुलपति डॉक्टर राणा सिंह और ओएसडी मीनाक्षी शर्मा ने छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
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