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सिविल सेवा प्रिलिमिनरी एक्जाम, ऐसे करें तैयारी

Tue, 02 Sep 2014 01:35 PM IST
एजुकेशन डेस्क
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देश की शीर्ष केंद्रीय प्रशासनिक सेवाओं में नियुक्ति हेतु चयन परीक्षा का आयोजन संघ लोक सेवा आयोग द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर प्रत्येक वर्ष किया जाता है। इस महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित परीक्षा के माध्यम से ही भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस),  भारतीय विदेश सेवा (आईएफ़एसद) आदि के लिए सक्षम अधिकारियों का चयन कर नियुक्तियां की जाती हैं। परीक्षा तीन हिस्सों में ली जाती है- प्रिलिमिनरी एग्जाम, मेन एग्जाम और पर्सनैलिटी टेस्ट (इंटरव्यू)। इस परीक्षा के लिए अमूमन साढ़े छह लाख आवेदन भरे जाते हैं, लेकिन परीक्षा में बमुश्किल साढ़े तीन लाख प्रत्याशी ही हिस्सा लेते हैं।
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परीक्षा का उद्देश्य
इस संपूर्ण परीक्षा का एकमात्र उद्देश्य सक्षम प्रशासनिक अधिकारियों का चयन करना है, जिनमें देश की बागडोर संभालने की योग्यता और उपयुक्त एप्टीट्यूड हो। इसलिए याददाश्त क्षमता, तर्कसंगत सोच, विभिन्न विषयों और अवधारणाओं से जुड़ी स्पष्टता, तुरंत निर्णय लेने की योग्यता जैसे गुणों की खासतौर पर परख की जाती है। महज रटने से सफलता हाथ नहीं लग सकती, बल्कि विषय को गहराई से समझना भी आवश्यक है।

योग्यता क्या हो
परीक्षा में शामिल होने के लिए युवाओं का कम से कम स्नातक डिग्रीधारक होना अनिवार्य है। आयु सीमा 21 से 32 वर्ष तक है। आयु सीमा का आकलन 1 अगस्त, 2014 को आधार बनाकर किया जाएगा। विभिन्न वर्गों के प्रत्याशियों के लिए आयु सीमा में छूट की व्यवस्था भी है। सामान्य वर्ग के प्रत्याशी अधिकतम 6 बार और अन्य पिछड़े वर्ग के प्रत्याशी अधिकतम 9 बार इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के प्रत्याशियों के लिए कोई सीमा नहीं है।
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प्रिलिमिनरी परीक्षा का स्वरूप  
वर्ष 2011 से इस परीक्षा को सिविल सर्विस एप्टीट्यूड टेस्ट के नाम से जाना जाता है और इसमें दो पेपर होते हैं। दोनों पेपर ऑब्जेक्टिव टाइप के होते हैं और प्रत्येक पेपर के लिए 200 अंक निर्धारित हैं। पेपर - 1 में जनरल स्टडीज से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं, जिसके तहत इतिहास, करंट अफेयर्स, ज्योग्राफी, राजनीति, प्रशासन, आर्थिक एवं सामाजिक विकास, पर्यावरण, जलवायु और सामान्य विज्ञान जैसे विषयों से प्रश्न आते हैं। पेपर - 2 में प्रत्याशियों के एप्टीट्यूड, लॉजिकल थिंकिंग पर आधारित प्रश्न होते हैं, जिनमें कॉम्प्रिहेंशन एंड एनालिटिकल स्किल्स, कम्युनिकेशन स्किल्स, लॉजिकल रीजनिंग, डिसीजन मेकिंग, प्रॉब्लम सॉल्विंग, डेटा एंटरप्रेटेशन, इंग्लिश लैंग्वेज और मेंटल एबिलिटी की परख के लिए प्रश्नों को रखा जाता है। ध्यान रहे कि यह क्वालिफाइंग टाइप की परीक्षा होती है और इसमें सफल होने वालों को ही मेन सिविल सर्विस एग्जाम में शामिल होने का अवसर मिलता है। मेरिट लिस्ट बनाने में इसके अंक शामिल नहीं किए जाते हैं।

परीक्षा केंद्र
पटना, लखनऊ, दिल्ली, चंडीगढ़ सहित देश के 59 स्थानों पर परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे। आवदेन करने के दौरान ही परीक्षा केंद्र का जिक्र करना होगा।  

नेगेटिव मार्किंग
प्रिलिमिनरी एग्जाम में काफी सोच-समझ कर ही प्रश्नों के उत्तर दें, क्योंकि गलत उत्तर के लिए इसमें नेगेटिव मार्किंग का भी प्रावधान है।

महत्वपूर्ण तिथियां
आवेदन की अंतिम तिथि  30 जून, 2014 है और प्रिलिमिनरी एग्जाम का आयोजन 24 अगस्त, 2014 को होगा। अधिक जानकारी के लिए आयोग की वेबसाइट www.upsc.gov.in और http://www.upsconline.nic.in देख सकते हैं। इस परीक्षा में आवेदन के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा है। वेबसाइट पर ही इससे संबंधित जानकारी विस्तार से उपलब्ध है। इस परीक्षा में मिली सफलता के बाद मेन एग्जाम के लिए पुनः आवेदन करना होगा।  
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तैयारी के लिए टिप्स
स्पीड विद एक्यूरेसी पर ध्यान देना जरूरी है।
क्वालिफाइंग नेचर का एग्जाम समझते हुए आधे-अधूरे तरीके से तैयारी करने की गलती कतई नहीं करें।
महत्वपूर्ण टॉपिक्स के छोटे नोट्स बनाएं, ताकि एग्जाम से पहले वाले दिन आसानी से पुनरावृत्ति कर सकें। इस क्रम में चार्ट्स बनाना भी फायदेमंद हो सकता है।
हिस्ट्री, इकोनॉमिक्स और पॉलिटिकल साइंस के लिए एनसीईआरटी की टेक्स्ट बुक्स उपयोगी सिद्ध हो सकती हैं।
मैथ्स के लिए शॉर्टकट फॉर्मूलों की जानकारी और उनकी प्रैक्टिस जरूरी है।
करंट अफेयर्स के लिए न्यूजपेपर, टीवी और इंटरनेट से मदद मिल सकती है।    
लॉजिकल थिंकिंग पर आधारित प्रश्नों के लिए बाजार में उपलब्ध किसी पुस्तक से प्रैक्टिस करें।
विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित गत पांच वर्षों की महत्वपूर्ण घटनाक्रमों को अवश्य देख लें।
पेपर-2 के लिए दसवीं की अंग्रेजी और मैथ्स पुस्तकों के अलावा ग्रामर पर भी ध्यान दें।
पिछले वर्षों के प्रश्न-पत्रों को निर्धारित समय में हल करने के अभ्यास से भी फायदा मिलेगा।
इंग्लिश कॉम्प्रिहेंशन की तैयारी के लिए अंग्रेजी अखबार और अन्य मैग्जीन नियमित पढ़ने की आदत डालें।
इंटरनेट पर उपलब्ध मॉक पेपर्स की प्रैक्टिस रोजाना करें।

बॉक्स
गुरु मंत्र यह है-
इसमें नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान होने के कारण संशय वाले उत्तरों पर निशान बिलकुल नहीं लगाएं।
प्रत्येक विषय के विस्तार में जाने का प्रयास नहीं करें। इसके लिए न तो आपके पास अधिक समय है और न ही इतना कुछ याद रख पाना संभव होगा।
पढ़ाई टाइम टेबल और रोजाना के निर्धारित लक्ष्य के अनुसार करें।
जितनी तैयारी कर रहे हैं, उस हिस्से का समय-समय पर रिवीजन जरूर करते रहें। इससे भूलने की स्थिति नहीं बनेगी
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