SFI ने झाड़ा पल्ला
छात्र संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने इस विरोध से खुद को अलग कर लिया है। संगठन के एक नेता ने कहा कि यह छात्राओं का निजी फैसला था और इसका एसएफआई के दीक्षांत समारोह के दौरान छात्र संघ चुनाव, आईसीसी में प्रतिनिधित्व या कैंपस सुरक्षा को लेकर चल रहे प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन किसी ऐसे कदम का समर्थन नहीं करता, जिससे किसी की भावनाएं आहत हों।
फैकल्टी ने आरोपों को किया खारिज
हालांकि, यूनिवर्सिटी के फैकल्टी सदस्यों ने इस्लामोफोबिया के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। इंग्लिश विभाग के एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने कहा कि परीक्षा के दौरान नकल के कई मामले सामने आए थे, जिसके बाद निगरानी सख्त की गई थी। पिछले सप्ताह कम से कम चार छात्र हेडफोन के जरिए नकल करते पकड़े गए थे, जिनमें कोई भी अल्पसंख्यक समुदाय से नहीं था।
प्रोफेसर के अनुसार, उस दिन एक छात्रा को हूडी पहने हुए हेडफोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था। उसे एक अन्य थर्ड ईयर की छात्रा की मौजूदगी में पास के कमरे में ले जाया गया, जहां कोई और मौजूद नहीं था। छात्रा के सहयोग के बाद परीक्षा बिना किसी आपत्ति के आगे बढ़ाई गई।
आरोपों को बताया निराधार
पोस्टर दिखाने वाली एक छात्रा ने दोहराया कि इनविजिलेटर का संदेह पूरी तरह बेबुनियाद था। वहीं प्रोफेसर ने स्पष्ट किया कि उसी परीक्षा में हिजाब पहनने वाली दो अन्य छात्राओं, जिनमें एक दिव्यांग भी थी, की कोई जांच नहीं की गई।
फैकल्टी का कहना है कि जादवपुर यूनिवर्सिटी पर इस्लामोफोबिया जैसे आरोप लगाना गलत है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर शिक्षकों को इस तरह निशाना बनाया गया, तो उनके लिए अपनी जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो जाएगा।
वीसी ने जांच का भरोसा दिलाया
हालांकि यूनिवर्सिटी की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन वाइस चांसलर चिरंजीब भट्टाचार्य ने कहा कि छात्रों ने उन्हें एक पत्र सौंपा है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।