सपना था डॉक्टर बनने का, रास्ता मिला इंजीनियरिंग में
कर्नाटक के तीर्थहल्ली तालुक के कोडूर गांव की रहने वाली रितुपर्णा ने शुरुआती पढ़ाई सेंट एग्नेस स्कूल से की। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीयूसी (Pre-University Course) के बाद उनका सपना था डॉक्टर बनने का, लेकिन नीट (NEET) में सरकारी सीट न मिलने पर उन्होंने कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) से इंजीनियरिंग की राह पकड़ी और सह्याद्रि कॉलेज में राबोटिक्स एंड ऑटोमेशन इंजीनियरिंग में दाखिला लिया।
किसानों के लिए बनाया रोबोट, जीते कई अवॉर्ड
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉलेज में दाखिले के बाद रितुपर्णा ने रोबोटिक्स में रुचि ली। उनका पहला प्रोजेक्ट किसानों के लिए था। एक ऐसा रोबोटिक सिस्टम जो सुपारी की खेती में काम आए। इस इनोवेशन को गोवा में INEX प्रतियोगिता में पेश किया गया, जहां उनकी टीम को गोल्ड और सिल्वर मेडल मिला। इसके बाद रितुपर्णा ने NITK सुरथकल में रोबोटिक सर्जरी पर काम किया और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर एक ऐप बनाने में प्रशासन की मदद की।
रॉल्स रॉयस तक का सफर
रितुपर्णा ने इंटरनेशनल एक्सपोजर के लिए रॉल्स रॉयस में इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया। शुरुआत में कंपनी ने उनके काबिल होने पर सवाल उठाया और कहा कि वह एक भी काम समय पर पूरा नहीं कर पाएंगी। लेकिन रितुपर्णा ने एक महीने की डेडलाइन वाला टास्क एक हफ्ते में पूरा कर दिखाया। इसके बाद कंपनी ने उन्हें कई प्रोजेक्ट्स दिए और आठ महीने तक लगातार उनका मूल्यांकन किया गया।
जब मेहनत रंग लाई
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिसंबर 2024 में रॉल्स रॉयस ने उन्हें जेट इंजन मैन्युफैक्चरिंग डिवीजन में प्री-प्लेसमेंट ऑफर दिया। जनवरी 2025 से वे रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक कंपनी के लिए रिमोट काम करने लगीं, साथ ही दिन में कॉलेज की पढ़ाई भी जारी रखी। अप्रैल 2025 में कंपनी ने उनकी सैलरी 39.6 लाख रुपये से बढ़ाकर 72.3 लाख रुपये सालाना कर दी। अब वह सातवां सेमेस्टर पूरा होने के बाद अमेरिका के टेक्सास स्थित यूनिट में काम शुरू करेंगी।
सफलता की नई परिभाषा
रितुपर्णा की कहानी इस सोच को चुनौती देती है कि केवल बड़े शहरों या प्रतिष्ठित संस्थानों के छात्रों को ही अंतरराष्ट्रीय मौके मिलते हैं। उन्होंने साबित किया कि अगर जज्बा और मेहनत हो, तो कोई भी छात्र दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में अपनी जगह बना सकता है।