भारतीय कला को मिलेगी वैश्विक पहचान
इग्नू की कुलपति उमा कंजिलाल ने इस अवसर पर कहा, “यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उस दृष्टिकोण को साकार करती है, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा और कला रूपों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने की बात कही गई है।”
उन्होंने कहा कि यह अपनी तरह की पहली पहल है जिसमें रचनात्मक कला को संरचित डिजिटल पाठ्यक्रमों के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
पटनायक का सपना साकार
पटनायक ने कहा, “सैंड आर्ट को वैश्विक स्तर पर भारतीय रचनात्मकता का प्रतीक बनाना मेरा सपना था। अब इग्नू और SWAYAM के जरिए हम हजारों लोगों को कहीं से भी इस कला को सीखने का अवसर दे रहे हैं।”
दोनों कोर्सों में वीडियो व्याख्यान, डेमोंस्ट्रेशन, और प्रायोगिक असाइनमेंट शामिल हैं। कोर्स पूरा करने पर प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी मिलेगा। शुरुआती कोर्स में मूल उपकरणों और तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि उन्नत पाठ्यक्रम में बड़े आकार की रचनाओं और रेत के जरिए कहानी कहने की कला सिखाई जाएगी।
इच्छुक विद्यार्थी इन कोर्सों में नामांकन के लिए SWAYAM की आधिकारिक वेबसाइट onlinecourses.swayam2.ac.in पर जा सकते हैं।