1950 में हुआ था जन्म
राकेश झुनझुनवाला का जन्म 5 जुलाई, 1960 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता राधेश्यामजी झुनझुनवाला इनकम टैक्स ऑफिसर थे। ऐसा माना जाता है कि बचपन से ही वह उनके पिता को अपने दोस्तों से शेयर मार्केट आदि पर बात करते सुना करते थे। यही कारण था कि कम उम्र से ही उनका रुझान शेयर मार्केट और इनवेस्टमेंट की ओर हो गया।
सीए की पढ़ाई की थी
राकेश झुनझुनवाला की पढ़ाई बहुत ही सामान्य तरीके की थी। उन्होंने साल 1985 में मुंबई में सिडेनहैम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स से बीकॉम की पढ़ाई पूरी की थी। उन्हें इसके बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का मन किया। इसके बाद उन्होंने द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया में प्रवेश लिया था और यहां से अपने सीए की पढ़ाई पूरी की थी।
5,000 रुपए से 41 हजार करोड़ तक का सफर
राकेश झुनझुनवाला को भारत का वारेन बफेट, शेयर मार्केट का बिगबुल आदि नाम से जाना जाता था। इसका कारण था उनका अनोखा सफर। झुनझुनवाला ने इनवेस्टमेंट की शुरुआत केवल पांच हजार रुपये से की थी और वर्तमान में उनकी नेटवर्थ करीब 40 हजार करोड़ रुपए से अधिक की थी। वह Rare Enterprises नामक स्टॉक ट्रेडिंग फर्म चलाते थे। टाइटन घड़ी, क्रिसिल, सेसा गोवा, प्राज इंडस्ट्रीज, अरबिंदो फार्मा और एनसीसी में आदि में उनके निवेश थे।
पिछले हफ्ते ही शुरू की थी अकासा एयरलाइंस
साल 2021 में राकेश झुनझुनवाला ने देशवासियों को सस्ती हवाई यात्रा की सुविधा देने के लिए एयरलाइंस कंपनी लांच करने का एलान किया था। बीते हफ्ते सात अगस्त को इसकी शुरुआत भी हो गई जब अकासा एयर ने मुंबई से अहमदाबाद के लिए अपनी पहली उड़ान भरी थी। बता दें कि लोगों का कहना था कि झुनझुनवाला अगर मिट्टी को भी छू दें तो वह सोना बन जाती थी। यही कारण था कि एविएशन सेक्टर में उनकी एंट्री से इस सेक्टर में बड़े बदलाव आने की उम्मीद की जा रही थी।
जानें परिवार के बारे में
1987 में राकेश झुनझुनवाला की शादी रेखा झुनझुवाला से हुई। दोनों के तीन बच्चे हैं। राकेश झुनझुनवाला की बेटी का नाम निश्था और दो बेटे आर्यमन व आर्यवीर हैं। रेखा झुनझुनवाला भी एक स्टॉक मार्केट इन्वेस्टर हैं। रेखा भी अपने पति की तरह ही कई कंपनियों में स्टेकहोल्डर हैं। झुनझुनवाला की मौत पर बड़ी हस्तियों से लेकर आम इंसान तक शोक प्रकट कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख जताते हुए कहा- राकेश झुनझुनवाला अदम्य थे। जीवन से भरपूर, मजाकिया और व्यावहारिक, वह अपने पीछे वित्तीय दुनिया में एक अमिट योगदान छोड़कर गए हैं। वह भारत की प्रगति के प्रति भी बहुत भावुक थे। उनका जाना दुखद है। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं। ऊँ शांति।