23 अगस्त को दिल्ली जाएगी टीम
महिमा राजपूत कहती हैं, "मेरा चयन 'शक्तिसैट' मिशन के लिए हो गया है। यह बात मेरी प्रधानाचार्य ने मेरी मार्गदर्शक शिक्षिका को बताई और उन्होंने मेरा पंजीकरण करवा दिया। पंजीकरण के बाद कुछ मॉड्यूल शुरू हुए, जिनसे विज्ञान और उपग्रहों के बुनियादी सिद्धांतों को समझने में मदद मिली। कुल 21 मॉड्यूल और 365 पाठ थे, जिनसे हमें बहुत लाभ हुआ।
महिमा ने आग कहा कि, हमें उपग्रह बनाने का प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें कुल 108 देशों के छात्र शामिल हैं। 23 अगस्त को हमें दिल्ली जाना है, जहां हम एक उपग्रह बनाएंगे जो चंद्रमा की सतह पर उतरेगा, और दूसरा उपग्रह चंद्रमा की कक्षा में परिक्रमा करेगा। फिर हम इसे अक्तूबर में प्रक्षेपण करेंगे..."
महिमा का लक्ष्य सिविल सर्विस जाना
उन्होंने आगे कहा कि उन्हें अपनी इस उपलब्धि पर गर्व है, लेकिन उनका असली लक्ष्य अलग है। वे आगे चलकर सिविल सर्विस में जाना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि उनका बचपन से ही वर्कर बनने का सपना रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्पेस प्रोजेक्ट में बच्चों का चयन पूरा
महिमा की मार्गदर्शक शिक्षिका योगेश्वरी लाहिड़ी कहती हैं, "यह एक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष परियोजना है जिसमें दुनिया भर से बच्चों का चयन किया जाना था... चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब अगस्त में अन्य देशों के बच्चे भारत, दिल्ली आएंगे और हमारे बच्चे भी दिल्ली जाएंगे। बच्चे वहां उपग्रह बनाएंगे... श्रीहरिकोटा के बच्चे और वैज्ञानिक अक्तूबर में दो उपग्रहों का प्रक्षेपण करेंगे... कुल मिलाकर राष्ट्रीय स्तर के प्रथम चरण के चयन में दो बच्चों का चयन हुआ था। उसके बाद... महिमा का चयन राष्ट्रीय स्तर के प्रथम चरण के लिए हुआ है..."
