क्यूएस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बेन सोटर ने कहा कि भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है जो वर्ष 2028 तक जापान और जर्मनी को पछाड़कर तीसरे पायदान पर आ जाएगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार, भारत 5.9% की विकास दर हासिल कर लेगा। वहीं, गोल्डमैन सैशे ने 6.3% का अनुमान जताया था जो मई में हासिल हो चुकी है। तेज आर्थिक विकास के बाद भी युवाओं को नौकरियों के मौके देना चुनौती होगी।
दरअसल, भारत में 53% आबादी 30 वर्ष से कम उम्र की है जो दिखाती है कि युवा देश है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में मल्टी डिसिपिलिनरी शिक्षा, कौशल विकास, अनुसंधान और नवाचार पर फोकस है। इसमें 2035 तक उच्च शिक्षा में 50 फीसदी नामांकन, शिक्षकों की भर्ती आदि पर काम हो रहा है।
देश में उच्च शिक्षा बाजार का आकार 2023-2028 के दौरान 9.9 फीसदी की वृद्धि दर (सीएजीआर) प्रदर्शित करने की उम्मीद है। भारत उन शीर्ष पांच देशों में है जहां विश्वविद्यालय जाने वाले छात्रों की संख्या सबसे अधिक है, जबकि 100 में से 42 युवाओं को नौकरी नहीं मिल पा रही या उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। नतीजतन 73 मिलियन युवा आबादी बेरोजगार है। वर्तमान में रोजगार की तलाश करने वालों में हर महीने एक लाख लोग बढ़ रहे हैं।
उधर, एचएसबीसी में चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजल भंडारी ने उम्मीद जताई थी कि भारत अगले एक दशक में 70 लाख नए रोजगार अवसर पैदा करेगा। अनुमान है कि केवल 24 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा जबकि 46 लाख को कोई काम नहीं मिल सकेगा। इसलिए हमारा यह मानना है कि बढ़ती आबादी, युवाओं को रोजगार, जॉब के कम मौके, शिक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और नौकरियों में शिक्षा की गुणवत्ता जैसे विषय भारत में प्रमुखता से उभर रहे हैं। इन सभी मुद्दों से निपटने के लिए नई शिक्षा नीति का प्रभावपूर्ण तरीके से लागू होना जरूरी है।