Kerala: सुप्रीम कोर्ट ने बीते गुरुवार केरल सरकार के गोपीनाथ रवींद्रन को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद कन्नूर विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में फिर से नियुक्त करने के फैसले को रद्द कर दिया। न्यायालय ने इस मामले में उनके अनुचित हस्तक्षेप की आलोचना भी की।
इस फैसले के बाद राजभवन से यह घोषणा की गई है कि प्रोफेसर बिजॉय नंदन कन्नूर विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्यभार संभालेंगे। चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने रवींद्रन को पद पर दोबारा नियुक्त करने के कुलाधिपति और राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के आदेश में गलती पाई और इस फैसले को रद्द कर दिया।
पीठ ने, जिसमें न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे, कहा कि राज्यपाल किसी राज्य में विश्वविद्यालयों का पदेन कुलाधिपति होता है और कुलाधिपति के रूप में सभी विश्वविद्यालय मामलों पर निर्णय लेने में मंत्रिपरिषद से स्वतंत्र रूप से कार्य करता है।
आगे कहा गया कि हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि हालांकि प्रतिवादी संख्या 4 (रवींद्रन) को कुलपति के पद पर फिर से नियुक्त करने की अधिसूचना कुलाधिपति (राज्यपाल) द्वारा जारी की गई थी, फिर भी पुनर्नियुक्ति का निर्णय बाहरी विचारों से प्रभावित था या कहें तो दूसरे शब्दों में, राज्य सरकार का अनुचित हस्तक्षेप इसमें शामिल था।