प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) ने भविष्य की मांगों के अनुसार शिक्षा प्रणाली को नया आयाम दिया है। शिक्षा प्रणाली में पहले लचीलेपन का अभाव था। एनईपी लचीलापन लेकर आई है और इसने भविष्य की मांगों के अनुसार शिक्षा प्रणाली को नया आयाम दिया है। नई शिक्षा नीति के अंग के रूप में शिक्षा और निपुणता, दोनों पर समान जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने 2023-24 के केंद्रीय बजट में की गई घोषणाओं को सूचीबद्ध करते हुए भारत को दुनिया की कौशल राजधानी बनाने की रूपरेखा को रेखांकित किया।
हर स्थान से ज्ञान तक सुगमता सुनिश्चित करने पर जोर
कोविड महामारी के दौरान के अनुभवों को मद्देनजर रखते हुए पीएम मोदी ने कहा, नई प्रौद्योगिकी नए स्वरूप की कक्षाएं बनाने में मदद कर रहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार उन उपायों पर गौर कर रही है, जो ‘हर स्थान से ज्ञान तक सुगमता’ सुनिश्चित करें। उन्होंने ‘स्वयं’ नामक ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म का उदाहरण दिया, जिसके तीन करोड़ सदस्य हैं। उन्होंने इस संभावना का संकेत दिया कि वर्चुअल प्रयोगशालाएं और राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय ज्ञान का विशाल माध्यम बन रहे हैं। वर्चुअल लैब और राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी में भी ज्ञान का बहुत बड़ा माध्यम बनने की संभावना है।
शिक्षकों की भूमिका अब कक्षाओं तक सीमित नहीं
प्रधानमंत्री ने कहा, वर्चुअल प्रयोगशालाएं और राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय जैसे भविष्यगामी पहलें हमारी शिक्षा, कौशल और ज्ञान-विज्ञान के पूरे परिप्रेक्ष्य को बदल देंगी। अब हमारे शिक्षकों की भूमिका कक्षाओं तक सिमट के नहीं रहेगी। उन्होंने उल्लेख किया कि देशभर से शिक्षा संस्थानों के लिए विविध शिक्षण समाग्री उपलब्ध हो जाएंगी, जो गांव व शहरी स्कूलों के बीच के अंतराल को पाटते हुए शिक्षकों के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेंगी।