प्रशासनिक निर्णयों में देरी से प्रभावित होते हैं अधिकार
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सही समय पर और जनहित में निर्णय लेना ही सच्ची नैतिकता है। उन्होंने कहा, “जैसे न्याय मिलने में देरी को न्याय से वंचित करना माना जाता है, उसी तरह प्रशासनिक निर्णयों में देरी भी लोगों के अधिकारों को प्रभावित करती है।”
उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल का उल्लेख करते हुए कहा कि शासन व्यवस्था में आज भी कुछ औपनिवेशिक सोच और कार्यशैली के अवशेष मौजूद हैं, जिन्हें खत्म करना जरूरी है। राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि आम लोगों को अपना समझकर काम करना ही एक सच्चे सिविल सेवक की पहचान है।
व्यवस्था के साथ बहते रहना आसान, बदलाव के लिए साहस दिखाना जरूरी
राष्ट्रपति ने कहा कि केवल व्यवस्था के साथ बहते रहना आसान होता है, लेकिन प्रभावी अधिकारी वही होता है जो जरूरत पड़ने पर बदलाव लाने का साहस दिखाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई बार परिस्थितियों के विपरीत जाकर भी काम करना पड़ेगा।
उन्होंने अधिकारियों को निष्पक्षता, पारदर्शिता और संवेदनशीलता बनाए रखने की सलाह दी। राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारियों को नियमों का पालन करते हुए व्यापक जनहित को भी ध्यान में रखना चाहिए।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि देश तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है, इसलिए आईएएस अधिकारियों से अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं। उन्हें तेजी से सीखने, बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने और विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करने की क्षमता विकसित करनी होगी।