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Words of 2020 : वे मुश्किल शब्द जो खास से आम हुए और पूरे साल सबकी जुबां पर छाए रहे

Mon, 28 Dec 2020 11:35 AM IST
Devesh Devesh एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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Words of 2020 - फोटो : iStock
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2020 खत्म होने वाल है। 2021 आने वाला है। हर बार बीता हुआ साल हमें कुछ सीख देकर जाता है। साथ ही नया साल नए संकल्प करवाता है। 2020 कई मायनों में एक न भूलने वाला या अनचाही यादों वाला साल रहा है। 2020 की शुरुआत से ही कोविड-19 संक्रामक महामारी के प्रकोप के कारण दुनिया में उथल-पुथल शुरू हो गई थी, जो साल के अंत तक भी जारी है।

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खैर, जिंदगी बीतते हुए समय के साथ आगे बढ़ती जाती है। इस साल ने हमें बहुत कुछ नया सिखाया। हमारी आदतें और जीवनशैली भी बदली। इन सबके बीच कुछ मुश्किल शब्द ऐसे हैं, जो इस साल खास से आम हुए और पूरे साल सबकी जुबां पर छाए रहे। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी भी इस साल वर्ड ऑफ द ईयर नहीं चुन सकी। इस साल एक नहीं कई शब्द चलन में रहे इसलिए ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने भी एक के बजाय कई शब्दों का चयन किया था। आइए डालते हैं एक नजर 2020 के चर्चित शब्दों पर --- 

बुशफायर (Bushfires)
यह शब्द जनवरी में ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी सबसे भीषण आग के दौरान चर्चा में आया था। यह ऑस्ट्रेलिया के इतिहास में अभी तक की सबसे खराब स्थिति थी। बुशफायर एक प्रकार की जंगल की आग हैं जो जंगली वनस्पतियों में तेजी से जलती हैं। ये आग अप्रत्याशित और नियंत्रित करने में मुश्किल होती है।

अक्विटल (Acquittal)
अक्विटल शब्द फरवरी 2020 में चर्चित रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के महाभियोग पर सुनवाई के दौरान सबसे ज्यादा उपयोग में आया। फरवरी 2020 में यह सुनवाई खत्म हुई थी।  

नोवल कोरोना वायरस और कोविड-19 (Novel Coronavirus /Covid-19)
2020 के शुरुआती तीन महीनों में ही कोरोना महामारी दुनिया के कई प्रमुख देशों में हजारों लोगों की जान ले चुकी थी। कोरोना वायरस के परिवार का नया विषाणु सार्स-सीओवी-2 यानी नोवल कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण कोविड-19 महामारी फैलती है। इस प्रजाति के दो वायरस सार्स और मर्स पहले भी दुनिया में कहर बरपा चुके थे।  

लॉकडाउन और अनलॉक (Lockdown & Unlock) :
कोरोना महामारी के दौरान दुनिया ठप सी हो गई थी। हर कोई घर में बंद था। दफ्तर, शिक्षण संस्थान, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे सब तालाबंदी के दायरे में आ गए थे। अलग-अलग देशों में यह स्थिति तीन से पांच के लंबे समय तक चली। अभी तक भी हालात सामान्य नहीं हो पाएं हैं। अब धीरे-धीरे अनलॉक यानी दोबारा खोलने की शुरुआत हो रही है। 

कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग (Contact tracing) : 
लोगों को ढूंढ़ना कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग कहलाता है। कोविड-19 महामारी की संक्रमण चैन तोड़ने के लिए कोरोना संक्रमितों का पता लगाकर उनके संपर्क में आए लोगों ढूंढ़ा गया।  

क्वारंटीन और आइसोलेशन (Quarantine & Isolation) :  
कोरोना संक्रमण की आशंका वाले संदिग्ध व्यक्ति को क्वारंटीन यानी संगरोध में रखा जाता है। वहीं, कोरोना संक्रमित पाए जाने वाले रोगी को आइसोलेशन यानी अलग-थलग करते हुए पृथकवास केंद्रों और होम आइसोलेशन में रखा गया था। कोरोना महामारी को लेकर ये शब्द बहुत चर्चित रहे। 

सर्किट ब्रेकर (Circuit Breaker) : 
शेयर बाजार की तेजी और गिरावट को बताने वाला यह शब्द 1997 के बाद मार्च 2020 में दोबारा प्रचलन में आया था। कोरोना संक्रमण से निपटने में नाकाम दिखे अमेरिका के शेयर बाजार में अभूतपूर्व गिरावट देखी गई। लाखों लोग बेरोजगार हो गए थे। पांच खरब डॉलर डूब चके थे, तब अमेरिका बाजार में सर्किट ब्रेकर लगाया गया था।  

कंटेनमेंट जोन (Containment Zone) :
कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के लिए इलाकों को जोन में बांटा गया ग्रीन, यलो और सबसे ज्यादा रेड जोन। इन्हें कंटेनमेंट जोन या संवाहक क्षेत्र कहा गया। जिस इलाके में मरीज ज्यादा पाए गए उसे कंटेनमेंट जोन और रेड जोन घोषित किया जाता था।

सुपर स्प्रेडर (Super Spreader)
कोरोना महामारी के कारण दूध, फल, सब्जी, किराना आदि दुकानदारों को सुपर स्प्रेडर की श्रेणी में रखा गया, क्योंकि इनके संपर्क में रोज सैकड़ों ग्राहक आते थे। इससे अगर ये संक्रमित होते तो हजारों लोगों तक कोरोना संक्रमण फैल जाने की आशंका थी। 

पैनडेमिक (Pandemic) :
डिक्शनरी डॉट कॉम ने पैनडेमिक शब्द को 2020 का वर्ड ऑफ द ईयर घोषित किया। दरअसल, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना वायरस संक्रमण को पेनडेमिक यानी वैश्विक महामारी घोषित किया था। इसे मार्च 2020 में घोषणा के बाद ही इसे सबसे ज्यादा ऑनलाइन सर्च किया गया।

ब्लैक लाइव्ज मैटर (Black Lives Matter):
अमेरिका में लॉकडाउन से ढील मिलने से लेकर राष्ट्रपति चुनाव के पहले तक विशेषकर जून के बाद से ही ब्लैक लाइव्ज मैटर आंदोलन ने दुनियाभर का ध्यान खींचा। पुलिस द्वारा अश्वेतों के उत्पीड़न के खिलाफ यह आंदोलन चुनाव में राष्ट्रपति ट्रंप की हार का एक अहम कारण भी बना। अमेरिका में नस्लभेद और नस्लीय हिंसा के खिलाफ यह आंदोलन हिंसक भी हुआ और काफी नुकसान भी पहुंचा। इसकी शुरुआत पुलिस कार्रवाई में जार्ज फ्लॉयड नामक अश्वेत व्यक्ति की मौत के बाद हुई थी। मौत के बाद वह इस पुलिस सुधारों की वकालत वाले आंदोलन का चेहरा बन गए थे। 

सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing)
कोरोना महामारी से सामाजिक मेल-मिलाप के तौर-तरीकों को ही बदल दिया। जनता ने भी न्यू नॉर्मल मानते हुए एक-दूसरे से शारीरिक दूरी बनानी शुरू की। दूर से मिलना, नए तरीकों से हाय, हैलो करना। दो गज की दूरी, है जरूरी वाक्य बच्चे-बच्चे की जुबां चढ़ गया। वहीं, सामाजिक कार्यक्रमों और त्योहार में कम लोगों की शिरकत, ऑनलाइन मुलाकातें आदि चीजें सामान्य तौर पर स्वीकारी गईं। 

फ्रंटलाइन वर्कर्स और कोरोना वारियर्स (Frontline Workers & Corona Warriors) :
कोरोना महामारी के दौरान जब दुनिया घरों में कैद थी, तब फ्रंटलाइन वर्कर्स के तौर पर चिकित्सक-नर्स, दवा विक्रेता, पुलिस और पत्रकार जैसे पेशेवर लोग कोरोना संक्रमितों को ढूंढ़ने, उनका उपचार कराने, लोगों तक आम जरूरत की चीजों को पहुंचाने में लगे हुए थे। इन लोगों को कोरोना योद्धा यानी कोरोना वारियर्स कहा गया। 

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) : 
मलेरिया में इस्तेमाल होने वाली यह दवा कोरोना महामारी के दौरान खूब चर्चा में रही। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब शुरुआती तौर पर इसे कोरोना के खिलाफ प्रभावकारी बताया तो दुनियाभर में इसकी मांग बढ़ गई थी। भारत ने अमेरिका समेत कई देशों को इस दवा की आपूर्ति की थी। हालांकि, बाद में यह ज्यादा प्रभावी साबित नहीं हुई। 

ब्लर्स-डे (Blursday)
लॉकडाउन में घरों में कैद रहने के कारण लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई। लोग रोजनारा एक ही जैसे माहौल में रहकर दिन और तारीखें तक भूलने लगे थे। हर दिन एक ही जैसा काम था। इसे स्थिति को लेकर ब्लर्स-डे शब्द प्रचलन में आया। 

फ्लैटन द कर्व (Flatten the Curve)
गणित का यह शब्द कोरोना काल में खूब सुनने को मिला। कोरोना महामारी की स्थिति बताने के लिए विशेषज्ञ इसी शब्द के जरिये ग्राफिक्स में उतार-चढ़ाव को बताया करते थे। मरीजों की बढ़ती संख्या पर काबू पाने की स्थिति को फ्लैटन द कर्व कहा गया। 

डूम स्क्रॉलिंग (Doomscrolling) :  
लॉकडाउन के दौरान दिनभर घर में रहने और नौकरियां गंवाने वाले लोगों के मन में नकारात्मकता में वृद्धि देखी गई। दिनभर चारों ओर से मोबाइल, टीवी, अखबार पर ऐसी ही नकारात्मक खबरें दिखाई पड़ती थीं। ऐसी स्थिति के बावजूद सामान्य जीवनयापन हुआ। इस भय वाली स्थिति को बताने के लिए डूम स्क्रॉलिंग नाम दिया गया। 
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ये शब्द भी रहे चर्चा में
मास्क, सेनेटाइज, पीपीई किट, ऑनलाइन क्लास, वर्क फ्रॉम होम, इम्युनिटी, हर्ड इम्युनिटी, नेट जीरो, एल्बो बम्प या एल्बो शेकिंग, वर्केशन, वर्चुअल हैप्पी आवर, कोविडियट्स, जूम आदि शब्द भी 2020 के दौरान खूब चर्चा में रहे हैं। 
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