'प्लाॉगिंग' दो अलग-अलग शब्दों से जुड़कर बना है। जॉगिंग और प्लॉका अप (Jogging and Plocka upp)। अंग्रेजी शब्द पिक अप (pick up) को स्वीडिश भाषा में प्लॉका अप कहते हैं।
प्लॉगिंग तेजी से उभरता हुआ अंतरराष्ट्रीय ट्रेंड है जिसमें लोग जॉगिंग करते हुए या तेजी से चलते हुए रास्ते पर पड़ा कूड़ा उठाते हैं। इससे एक साथ दो काम हो जाते हैं- फिटनेस और सफाई।
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यह ट्रेंड 2016 में स्वीडन में शुरू हुआ था। एरिक एलस्ट्रम ने इसकी शुरुआत की थी। जब एरिक ने देखा कि सड़कों पर हफ्तों तक कूड़ा पड़ा रहता है, लेकिन कोई उसे उठाकर कूड़ेदान में डालने की जहमत नहीं उठाता। इसके बाद उन्होंने खुद ये काम शुरू किया। रोज अपनी एक्सरसाइज व रनिंग के दौरान एरिक जिस रास्ते से गुजरते, वहां पड़ा कूड़ा भी उठाते जाते।
इस गतिविधि को ट्रेंड बनाने में कुछ लोगों के साथ-साथ सोशल मीडिया का सबसे बड़ा योगदान रहा। धीरे-धीरे प्लॉगिंग एक अंतरराष्ट्रीय मुहिम बन गई है। यूरोप, अमेरिका, एशिया और अफ्रीका में कई समूह प्लॉगिंग को बढ़ावा दे रहे हैं।
भारत में केंद्र सरकार ने बीते 2 अक्तूबर को प्रधानमंत्री के फिट इंडिय मूवमेंट के तहत फिट इंडिया प्लॉग रन (Fit India Plog Run) का आयोजन किया था। 29 सितंबर को पीएम मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में लोगों से प्लॉगिंग करने की अपील की थी, ताकि भारत को स्वच्छ बनाया जा सके।
पीएम मोदी को कैसे आया Plogging का आइडिया
प्रधानमंत्री ने कहा था, 'हमारे ही देश के एक नौजवान ने बड़ा अनोखा अभियान चलाया है। उनके इस काम पर मेरा ध्यान गया तो मैंने उनसे फोन पर बात कर इस नए प्रयोग को जानने समझने की कोशिश की। रिपुदमन बेल्वी अनोखा प्रयास कर रहे हैं। वे प्लॉगिंग करते हैं। जब मैंने पहली बार प्लॉगिंग शब्द सुना तो मेरे लिए भी नया था। विदेशों में तो शायद ये शब्द कुछ मात्रा में उपयोग हुआ है। लेकिन भारत में रिपुदमन बेल्वी जी ने इसे बहुत प्रचारित किया है।'
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इसे शुरू करने वाले एरिक के अनुसार, आधे घंटे की प्लॉगिंग से कम से कम 288 कैलोरी कम की जा सकती है। जबकि इतने ही देर सिर्फ जॉगिंग करने से आप करीब 235 कैलोरी ही कम कर पाते हैं।