1964 में सेना में शामिल हुए, क्वेटा में आर्मी कमांड और स्टाफ कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और इसके बाद 1990 में ब्रिटेन जाकर लंदन स्थित रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज में स्नातकोत्त की पढ़ाई की। परवेज मुशर्रफ ने क्वेटा के स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के युद्ध विंग में पढ़ाया भी।
वह भारत के साथ पाकिस्तान के 1965 और 1971 के युद्धों में लड़े। उन्होंने तोपखाने, पैदल सेना और कमांडो इकाइयों में कई नियुक्तियां कीं। बाद में अक्तूबर 1998 में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने उन्हें सशस्त्र बलों का प्रमुख नियुक्त किया था।
मुशर्रफ ने 1999 की गर्मियों में भारतीय कश्मीर के हिस्से पर आक्रमण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भारत में मुशर्रफ को करगिल का विलेन कहा जाता है। अंतरराष्ट्रीय दबाव में, शरीफ ने बाद में सैनिकों को पाकिस्तानी नियंत्रित क्षेत्र में वापस जाने का आदेश दिया, एक ऐसा कदम जिसने सेना को नाराज कर दिया। नवाज सरकार के कदम से मुशर्रफ की अगुवाई वाली सेना में नाराजगी बहुत जयादाबढ़ गई थी।
इसके बाद 1999 में इस पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी ने नवाज शरीफ सरकार का तख्तापलट कर सत्ता संभाली थी। सैन्य तानाशाह के तौर पर उन्होंने 2001 से 2008 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया। वे पाकिस्तान पर सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले सैन्य तानाशाहों में शुमार रहे।