स्पेशल एजुकेटर्स की भर्ती में धीमी प्रगति, बजट का भी कम इस्तेमाल
समिति ने यह भी बताया कि नए स्पेशल एजुकेटर्स के लिए वित्तीय सहायता के तहत, 962 लाख रुपये के बजटीय अनुदान (एलिमेंट्री सेक्शन) के मुकाबले केवल 80.50 लाख रुपये का ही इस्तेमाल किया गया।
इसने यह भी गौर किया कि CwSN छात्रों के लिए स्पेशल एजुकेटर्स की भर्ती/उन्हें बनाए रखने के मामले में बहुत कम प्रगति हुई है।
दिव्यांग बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय के नज़रिए पर समिति ने कहा कि यह अधिकारों पर आधारित, समावेशी और समग्र है।
इसने कहा कि 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD Act), 2016' के तहत, बेंचमार्क दिव्यांगता वाले बच्चे 18 साल की उम्र तक मुफ्त शिक्षा पाने के हकदार हैं।
दिव्यांग छात्रों के लिए सुलभ शिक्षा पर समिति की सिफारिशें
- जीरो रिजेक्शन पॉलिसी: NEP 2020 के तहत दिव्यांगता के कारण किसी भी बच्चे को स्कूल में दाखिले से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
- शिक्षकों की ट्रेनिंग: समावेशी कक्षाओं को बेहतर तरीके से संभालने के लिए शिक्षकों को उचित प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया।
- बजट का समय पर इस्तेमाल: समिति ने CwSN से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए तय बजट का सही और समय पर इस्तेमाल करने की सिफारिश की।
- सुलभ बुनियादी ढांचा: दिव्यांग छात्रों के लिए स्कूलों में सुरक्षित और सुविधाजनक इंफ्रास्ट्रक्चर तय समय-सीमा में उपलब्ध कराने को कहा गया।
- स्पेशल एजुकेटर्स की भर्ती: मंत्रालय को देशभर में स्पेशल एजुकेटर्स की जरूरत का आकलन कर उनकी भर्ती जल्द पूरी करने की सिफारिश की गई।