क्या सभी 65 शिक्षा बोर्डों के लिए बनेगा एक समान नियामक ढांचा?
समिति ने कहा, "समिति का मानना है कि निगरानी की इस कमी से छात्रों के भविष्य और देश भर में सेकेंडरी एजुकेशन के मानकीकरण के लिए सीधा खतरा पैदा हो सकता है।"
समिति ने आगे कहा कि इससे "उन छात्रों की जानकारी में अंतर आ सकता है जिन्हें यूनिवर्सिटी और प्रोफेशनल एजुकेशन में सीट पाने के लिए मुकाबला करना होता है"।
इसे देखते हुए, समिति ने जोरदार सिफारिश की कि शिक्षा मंत्रालय नई शिक्षा नीति (NEP), 2020 के अनुसार सभी 65 एजुकेशन बोर्ड के कामकाज, मूल्यांकन के मानदंडों और सामान्य पाठ्यक्रम को एक जैसा बनाने के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय रेगुलेटरी ढांचा बनाए।
समिति ने यह भी सिफारिश की कि अनधिकृत प्राइवेट स्कूलों और बोर्ड की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए, मंत्रालय को किसी भी नए बोर्ड को मंज़ूरी देने से पहले एक सख्त, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम अनिवार्य करना चाहिए।
इसने यह भी सिफारिश की कि मंत्रालय एक पब्लिक डिजिटल रिपॉजिटरी शुरू करे जिसमें सभी मौजूदा मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय, राज्य और अंतरराष्ट्रीय बोर्ड की जानकारी हो, ताकि छात्रों को गैर-मान्यता प्राप्त संस्थानों से बचाया जा सके।