ये बातें बुधवार को लोकसभा में पेश की गई एस्टीमेट्स कमेटी (2026-27) की दसवीं रिपोर्ट का हिस्सा हैं। यह रिपोर्ट "देश में सस्ती और अच्छी शिक्षा देने के लिए बजट और नीतिगत पहलुओं, जिसमें सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) की समीक्षा भी शामिल है" पर आधारित है।
समिति ने गौर किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 के तहत शुरुआती स्कूली कक्षाओं में मातृभाषा में पढ़ाई और बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर व्यावहारिक कदम उठाए हैं। समिति ने कहा कि मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर तीन-भाषा फॉर्मूले और R1, R2, R3 भाषा व्यवस्था को लागू करने में प्रगति की है।
भाषा शिक्षा में बदलाव, 22 भाषाओं में किताबों का अनुवाद
इसके अलावा, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान की किताबों का 22 अनुसूचित भाषाओं में अनुवाद किया गया है। छात्रों को नए पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई में आसानी हो, इसके लिए ब्रिज कोर्स और ई-कंटेंट भी तैयार किए गए हैं।
इसमें यह भी बताया गया कि नए और अनोखे रिसोर्स इस्तेमाल किए गए हैं, जैसे कि 22 भाषाओं में 'जादुई पिटारा' (खेल-खेल में सीखने वाली किट), पूरे देश में भाषा की जानकारी देने वाला प्रोग्राम 'भाषा संगम', और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेजेज (CIIL) के साथ मिलकर तैयार की गई 121 मातृभाषा की शुरुआती किताबें (प्राइमर)।
इसके अलावा, केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) जैसे संगठनों ने स्थानीय भाषा के कॉन्ट्रैक्ट-आधारित टीचरों को रखकर पढ़ाने-लिखाने में जरूरी मदद दी है।
हालांकि, इतने अच्छे रिसोर्स होने के बावजूद, कमेटी ने पाया कि मंत्रालय ने पढ़ाई के मटीरियल, टीचरों की ट्रेनिंग, भाषा पढ़ाने वाले स्टाफ वगैरह की जरूरतों का पहले से अंदाजा नहीं लगाया था।
कमेटी ने कहा, "कमेटी ने देखा कि छठी क्लास से तीसरी भाषा का फॉर्मूला लागू किया गया है, लेकिन स्कूलों को तैयारी के लिए काफ़ी समय नहीं दिया गया - जैसे भाषा पढ़ाने वाले स्टाफ की भर्ती, पढ़ाई के मटीरियल की उपलब्धता, और भाषा चुनने को लेकर साफ जानकारी। इससे छात्रों, टीचर्स, माता-पिता और संबंधित स्कूल अधिकारियों पर तनाव बढ़ा।"