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DU FYUP: 70% से अधिक यूजी छात्र कर रहे हैं चौथे वर्ष की पढ़ाई जारी, एक अगस्त तक ऑप्ट-आउट का विकल्प खुला

Fri, 25 Jul 2025 09:32 AM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

DU FYUP: दिल्ली विश्वविद्यालय में चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम  को छात्रों का अच्छा समर्थन मिल रहा है। अब तक 70% से अधिक पात्र छात्रों ने चौथे वर्ष की पढ़ाई जारी रखने का विकल्प चुना है, जबकि जो छात्र बाहर निकलना चाहते हैं, उनके लिए 1 अगस्त तक ऑप्ट-आउट की सुविधा खुली है।
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दिल्ली विश्वविद्यालय, Delhi University - फोटो : University Of Delhi
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विस्तार
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DU FYUP: दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश सिंह ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत शुरू किए गए चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUP) को छात्रों का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि लगभग 72 प्रतिशत पात्र छात्रों ने चौथे वर्ष की पढ़ाई जारी रखने का विकल्प चुना है।

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उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय ने 1 अगस्त तक चौथे वर्ष से बाहर निकलने का विकल्प (Opt-Out) खुला रखा है, यानी जो छात्र चौथे वर्ष में नहीं पढ़ना चाहते, वे तय तिथि तक अपना निर्णय बदल सकते हैं।

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72 हजार में से 50 हजार छात्र चौथे वर्ष में जारी रखेंगे पढ़ाई

सिंह ने बताया, "अब तक 72,000 से अधिक छात्रों में से 20,221 छात्रों ने पढ़ाई छोड़ दी है, जिसका मतलब है कि 50,000 से अधिक छात्र पढ़ाई जारी रख रहे हैं। यह बहुत उत्साहजनक है और यह दर्शाता है कि छात्र चौथे वर्ष में पढ़ाई करने को महत्व देते हैं।"

दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों में चौथा वर्ष 1 अगस्त से शुरू होगा।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत लागू किया गया एफवाईयूपी कई एग्जिट पॉइंट प्रदान करता है - एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा और तीन साल के बाद डिग्री।

चौथे वर्ष को लेकर छात्रों में उत्साह

चौथा वर्ष पूरा करने वाले छात्रों को शोध, उद्यमिता और कौशल-आधारित शिक्षा पर अतिरिक्त जोर देते हुए ऑनर्स विद रिसर्च की डिग्री प्रदान की जाती है।

मई में दिए एक साक्षात्कार में, सिंह ने चौथे वर्ष को "गेम चेंजर" बताया था। उन्होंने कहा था, "यह पहली बार है जब शोध, उद्यमिता और कौशल पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है... यह चौथा वर्ष एक गेम चेंजर होगा।"

हालाँकि, शिक्षक संघ और शिक्षाविद संशय में हैं। कई लोगों का कहना है कि पुनर्गठित कार्यक्रम से पढ़ाई छोड़ने वालों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि छात्रों को चौथे वर्ष के मूल्य और विषयवस्तु के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है।
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बुनियादी सुविधाओं की कमी पर सवाल

अत्यधिक बोझ वाले संकाय और आवश्यक उन्नयन के लिए सीमित धन को लेकर भी चिंताएं हैं।

इन बुनियादी ढांचे संबंधी चिंताओं के बीच, सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय इन चिंताओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, "चिंता मत कीजिए। अगर सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा। यह हमारे छात्रों के हित में है।"

केवल एक सप्ताह शेष रहने के साथ, दिल्ली विश्वविद्यालय के सामने इन तार्किक और शैक्षणिक कमियों को दूर करने की चुनौती है। आने वाला समय यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह महत्वाकांक्षी सुधार स्नातक शिक्षा में बदलाव लाने के अपने वादे को पूरा कर पाएगा या तैयारी के अभाव में विफल हो जाएगा।  
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