दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने सत्ता में आने के बाद इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट कॉलेजों की गुणवत्ता पर काम शुरू किया। इसी के तहत 2016 में पहली बार तकनीकी कॉलेजों पर सख्ती के बाद अब हर साल उन्हें मंजूरी लेनी पड़ती है।
अब नियम का पालन और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई कराने वाले कॉलेजों को ही डिग्री और डिप्लोमा प्रोग्राम चलाने की मंजूरी मिलती है।