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सरकार का शिक्षा में नया प्रयोग : अब कहीं भी रहकर कभी भी पढ़ाई कर सकेंगे छात्र

Thu, 01 Apr 2021 11:53 PM IST
Jeet Kumar डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • कोरोना संकट ने दिखाई अद्भुत राह, अब कहीं भी रहकर कभी भी पढ़ाई कर सकेंगे छात्र, परीक्षा का मोड भी उनकी मर्जी पर होगा निर्भर
  • 6 सदस्यीय कमेटी वैश्विक मॉडलों का अध्ययन करेगी और एक सप्ताह के भीतर वर्चुअल स्कूल का ब्लूप्रिंट सौंपेगी
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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विस्तार
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शिक्षा के क्षेत्र में दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने ऐसे काम किए हैं जो हमेशा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र रहा है। उनकी नई पहल ‘कहीं भी, कभी भी शिक्षा' का नया अद्भुत मॉडल दुनिया को शिक्षा के क्षेत्र में नई राह दिखा सकता है।

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कोरोना काल में यह नई सोच बच्चों को शिक्षा सुनिश्चित करने के मामले में दुनिया को नई राह दिखा सकती है। इसके अंतर्गत बच्चों को स्कूल जाने की बाध्यता भी ख़त्म हो जायेगी तो वे अपनी मनपसंद की जगह पर रहकर कभी भी पढ़ाई कर सकेंगे।

शिक्षामंत्री मनीष सिसोदिया ने गुरूवार को शिक्षा के वर्चुअल मॉडल पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कोरोना जैसी महामारी का खतरा पैदा हुआ है, इसमें बच्चों की शिक्षा जारी रखना एक चुनौती बन गया है। ऐसे समय में वर्चुअल क्लास ही बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बन सकती है।
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उन्होंने कहा कि इसके सभी पक्षों पर चर्चा कर एक ऐसे मॉडल की स्थापना की जानी चाहिए जिससे बच्चों के शिक्षा की गुणवत्ता कम से कम प्रभावित हो और उनकी कक्षाएं आगे चलती रहें।

ध्यान रहे कि पिछले वर्ष में पूरे साल बच्चे स्कूल नहीं जा पाए और शिक्षा को लेकर बच्चों और अभिभावक लगातार तनाव में रहे।

बैठक के दौरान अमेरिका और न्यूजीलैंड में चल रहे वर्चुअल स्कूल के मॉडल पर चर्चा की गई। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ने स्कूल प्रिंसिपल, टीचर्स और आई.टी अधिकारियों की एक 6 सदस्यीय कमेटी गठन करने का निर्देश दिया। कमेटी अपने रिसर्च में अन्य वैश्विक मॉडलों का अध्ययन करेगी और एक सप्ताह के भीतर वर्चुअल स्कूल का ब्लूप्रिंट सौपेगी।

उपमुख्यमंत्री सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली का वर्चुअल स्कूल किसी भी अन्य नियमित स्कूल के जैसा ही होगा। नौवीं से बारहवीं तक संचालित होने वाले इस स्कूल की एक आईडी होगी, विद्यार्थी इसमें दाखिला लेंगे और उन्हें नामांकन आईडी दिया जाएगा।

ये स्कूल छात्र, शिक्षक, नियमित रूप से चलने वाली टीचिंग-लर्निंग गतिविधियां, आंकलन जैसे शिक्षण के सभी मूलभूत तत्वों से लैस होगा।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 1 साल के दौरान दिल्ली के शिक्षकों ने टीचिंग-लर्निंग के लिए जिस प्रकार से तकनीकी का बेहतरीन प्रयोग किया वो उल्लेखनीय है। हमारे शिक्षक तकनीकी के बेहतर उपयोग करना सीख गए है। उन्होंने कहा कि कोरोना के दौरान हुए ऑनलाइन टीचिंग-लर्निंग ने दिल्ली में देश के पहले वर्चुअल स्कूल की नींव रखने का काम किया है। 

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