समर्पित व्यवस्था और सरकारी सहयोग
अंडमान और निकोबार जनजातीय कल्याण विभाग के सचिव सत्येंद्र सिंह डुरसावत ने कहा, “यह उपलब्धि ओंगे समुदाय की कड़ी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक है। यह बदलाव उपराज्यपाल और द्वीप विकास एजेंसी (IDA) के उपाध्यक्ष एडमिरल डी.के. जोशी (सेवानिवृत्त) और मुख्य सचिव के नेतृत्व से संभव हुआ है।”
रहने और पढ़ाई के लिए विशेष इंतजाम
- स्कूल परिसर के पास छात्रावास बनाए गए हैं- अलग-अलग लड़के और लड़कियों के लिए।
- AAJVS (अंडमान आदिम जनजाति विकास समिति) और शिक्षा विभाग ने मिलकर छात्रों को स्टेशनरी, कपड़े, राशन, बैग, और अन्य जरूरी चीजें मुहैया कराईं।
- शिक्षक और कर्मचारी 24x7 मार्गदर्शन और देखभाल में लगे हैं ताकि ये छात्र डुगोंग क्रीक के पारंपरिक माहौल से औपचारिक शिक्षा प्रणाली में आसानी से समायोजित हो सकें।
ओंगे जनजाति: एक परिचय
ओंगे समुदाय अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह की एक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) है, जिसकी कुल जनसंख्या लगभग 136 है। यह समुदाय पारंपरिक रूप से सेमी-नोमैडिक यानी आधे खानाबदोश जीवनशैली अपनाता रहा है और पहले पूरी तरह से शिकार और संग्रह के माध्यम से अपना जीवन यापन करता था। हालांकि समय के साथ उनके जीवन में बदलाव आया है। अब स्थानीय प्रशासन द्वारा उन्हें राशन, कपड़े और अन्य आवश्यक वस्तुएं नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाती हैं। एक समय था जब ओंगे समुदाय के लोग कपड़े नहीं पहनते थे, लेकिन अब उन्होंने धीरे-धीरे कपड़े पहनने की आदत विकसित कर ली है।