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Onge Tribe Student: अंडमान की ओंगे जनजाति के नौ बच्चों ने पास की 10वीं परीक्षा, कक्षा 11 में पहली बार दाखिला

Sun, 20 Jul 2025 04:38 PM IST
शिवम गर्ग एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Andaman Tribal Students: अंडमान की विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह ओंगे जनजाति के नौ बच्चों ने पहली बार CBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा पास कर इतिहास रच दिया है। इन छात्रों ने अब कक्षा 11 (आर्ट्स स्ट्रीम) में दाखिला लेकर उच्च शिक्षा की ओर कदम बढ़ाया है।
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Admission 2025 - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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Class 11 Admission Onge Students: अंडमान की ओंगे जनजाति के 9 बच्चों ने पहली बार सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा पास की है और अब कक्षा 11 में दाखिला लिया है। यह उपलब्धि जनजातीय शिक्षा की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
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अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह की विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) में शामिल ओंगे जनजाति के 9 बच्चों ने सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर इतिहास रच दिया है। ये सभी छात्र अब लिटिल अंडमान स्थित पीएम श्री सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, आर.के. पुर (डुगोंग क्रीक) में कक्षा 11 (आर्ट्स स्ट्रीम) में पढ़ाई शुरू कर चुके हैं।

पहली बार ओंगे छात्रों ने पार की यह शैक्षणिक दहलीज

स्कूल शिक्षक प्रकाश तिर्की ने बताया, “हम बेहद गर्व के साथ यह घोषणा कर रहे हैं कि हमारे ओंगे छात्रों ने हाल ही में CBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा पास की है। यह पहली बार है जब ओंगे जनजाति के छात्र इतने उच्च स्तर की शिक्षा तक पहुंचे हैं। 15 जुलाई 2025 से इनकी कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं।” पढ़ाई में अव्वल इन छात्रों में 5 लड़कियां और 4 लड़के शामिल हैं: अलागाए, कोकोई, मुकेश, पालिथ, सोनिया, बॉलिंग, गीते, ओटिकलाई और सुमा।

बदलाव की सोच: सपने और संकल्प

छात्र अलागाए ने कहा, “मैं एक फॉरेस्ट ऑफिसर बनना चाहता हूं ताकि अपने जंगल और जमीन की रक्षा कर सकूं। जंगल हमारे जीवन का हिस्सा है और इसकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है।” ओटिकलाई नाम की छात्रा शिक्षिका बनकर अपने समुदाय को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना चाहती है, जबकि मुकेश का सपना है कि वह जनजातीय कल्याण अधिकारी बने।
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समर्पित व्यवस्था और सरकारी सहयोग

अंडमान और निकोबार जनजातीय कल्याण विभाग के सचिव सत्येंद्र सिंह डुरसावत ने कहा, “यह उपलब्धि ओंगे समुदाय की कड़ी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक है। यह बदलाव उपराज्यपाल और द्वीप विकास एजेंसी (IDA) के उपाध्यक्ष एडमिरल डी.के. जोशी (सेवानिवृत्त) और मुख्य सचिव के नेतृत्व से संभव हुआ है।”

रहने और पढ़ाई के लिए विशेष इंतजाम

  • स्कूल परिसर के पास छात्रावास बनाए गए हैं- अलग-अलग लड़के और लड़कियों के लिए।
  • AAJVS (अंडमान आदिम जनजाति विकास समिति) और शिक्षा विभाग ने मिलकर छात्रों को स्टेशनरी, कपड़े, राशन, बैग, और अन्य जरूरी चीजें मुहैया कराईं।
  • शिक्षक और कर्मचारी 24x7 मार्गदर्शन और देखभाल में लगे हैं ताकि ये छात्र डुगोंग क्रीक के पारंपरिक माहौल से औपचारिक शिक्षा प्रणाली में आसानी से समायोजित हो सकें।

ओंगे जनजाति: एक परिचय

ओंगे समुदाय अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह की एक विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) है, जिसकी कुल जनसंख्या लगभग 136 है। यह समुदाय पारंपरिक रूप से सेमी-नोमैडिक यानी आधे खानाबदोश जीवनशैली अपनाता रहा है और पहले पूरी तरह से शिकार और संग्रह के माध्यम से अपना जीवन यापन करता था। हालांकि समय के साथ उनके जीवन में बदलाव आया है। अब स्थानीय प्रशासन द्वारा उन्हें राशन, कपड़े और अन्य आवश्यक वस्तुएं नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाती हैं। एक समय था जब ओंगे समुदाय के लोग कपड़े नहीं पहनते थे, लेकिन अब उन्होंने धीरे-धीरे कपड़े पहनने की आदत विकसित कर ली है।
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