ओडिशा में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए अच्छी खबर है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने राज्य में पीजी यानी पोस्ट ग्रेजुएशन की 318 अतिरिक्त सीटों को मंजूरी दी है। इसके बाद राज्य में पीजी मेडिकल सीटों की कुल संख्या 620 से बढ़कर 938 हो गई है। यह मंजूरी पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों और दूसरे संस्थानों में अलग-अलग विभागों के लिए दी गई है। अधिकारियों के मुताबिक, इस फैसले से राज्य में मेडिकल शिक्षा का दायरा बढ़ेगा और छात्रों को पीजी की पढ़ाई के लिए ज्यादा मौके मिलेंगे।
किन कॉलेजों को मिली मंजूरी?
- एनएमसी की मंजूरी से ओडिशा के पांच नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पीजी कोर्स शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है।
- इन कॉलेजों में कुल 153 सीटें दी गई हैं।
- केओंझर के धरनीधर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल को 10 विभागों में 44 सीटें मिली हैं।
- सुंदरगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज को आठ विभागों में 22 सीटें और कोरापुट के एसएलएन मेडिकल कॉलेज को नौ विभागों में 28 सीटें दी गई हैं।
- तलचर और फूलबनी के मेडिकल कॉलेजों को भी क्रमशः 32 और 27 सीटें मिली हैं।
किन कॉलेजों में बढ़ीं सीटें?
राज्य के कुछ पुराने मेडिकल कॉलेजों में भी पीजी की सीटें बढ़ाई गई हैं। बारीपदा के पंडित रघुनाथ मुर्मू मेडिकल कॉलेज में सीटों की संख्या 20 से बढ़कर 53 हो गई है। बलांगीर के भीमा भोई मेडिकल कॉलेज में अब 10 की जगह 54 सीटें होंगी। बालासोर के फकीर मोहन मेडिकल कॉलेज में पीजी सीटें आठ से बढ़कर 54 हो गई हैं। भुवनेश्वर के पीजीआईएमईआर और कैपिटल अस्पताल को 11 अतिरिक्त सीटें मिली हैं। इससे इन संस्थानों में पढ़ाई के अवसर बढ़ेंगे।
दूसरे संस्थानों को कितनी सीटें मिलीं?
कटक के एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल को पीजी की 17 अतिरिक्त सीटें दी गई हैं। आचार्य हरिहर पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर को तीन और सीटें मिली हैं। वहीं, बुर्ला के वीआईएमएसएआर को 11 अतिरिक्त सीटें दी गई हैं। इन सभी मंजूरियों के बाद राज्य में पीजी मेडिकल सीटों की कुल संख्या 938 पहुंच गई है। पहले यह संख्या 620 थी। यानी अब मेडिकल के छात्रों के पास विशेषज्ञता की पढ़ाई करने के लिए पहले से ज्यादा विकल्प होंगे।
किन विषयों में मिलेंगी सीटें?
पीजी की ये अतिरिक्त सीटें कुल 14 विभागों में दी गई हैं। इनमें एनाटॉमी, एनेस्थीसिया, बायोकेमिस्ट्री, कम्युनिटी मेडिसिन, ईएनटी, जनरल मेडिसिन और जनरल सर्जरी शामिल हैं। इनके अलावा माइक्रोबायोलॉजी, प्रसूति एवं स्त्री रोग, हड्डी रोग, बाल रोग, पैथोलॉजी, मनोचिकित्सा और श्वसन रोग विभाग में भी सीटें बढ़ाई गई हैं। इन विषयों में पढ़ाई करने वाले छात्रों को अब ज्यादा मौके मिलेंगे। साथ ही, राज्य के अस्पतालों में अलग-अलग बीमारियों के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा?
ओडिशा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मुकेश महालिंग ने इस फैसले को राज्य में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व में राज्य के स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा क्षेत्र में नया अध्याय जुड़ा है। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और एनएमसी का भी धन्यवाद किया। मंत्री के मुताबिक, पीजी सीटों की संख्या बढ़ना सिर्फ मेडिकल शिक्षा का विस्तार नहीं है, बल्कि राज्य में ज्यादा कुशल डॉक्टर और विशेषज्ञ तैयार करने की दिशा में भी एक कदम है।
मरीजों को कैसे मिलेगा फायदा?
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि केओंझर, सुंदरगढ़, कोरापुट, तलचर और फूलबनी जैसे इलाकों में पीजी मेडिकल की पढ़ाई शुरू होने से राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास होगा। अभी कई मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने से लोगों को अपने घर के पास ही बेहतर इलाज मिल सकेगा। इससे स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी इलाज की बेहतर सुविधा मिलने में मदद मिलेगी।