स्कूलों के नेबरहुड (पड़ोस), पूर्व छात्र (एल्युमिनी), भाई-बहन (सिबलिंग) व गर्ल चाइल्ड जैसे मानकों के कारण जिन्हें अंक मिल जाएंगे उन्हें तो लॉटरी से गुजरना ही नहीं होगा। नर्सरी दाखिले की रेस में बड़ी संख्या में अभिभावक कुछ नामी स्कूलों में ही बच्चे का दाखिला कराना चाहते हैं। ऐसे नामी स्कूलों में पड़ोस, पूर्व छात्र, भाई-बहन, एकल कन्या के अंक काफी महत्वपूर्ण होते हैं।
हम इसे ऐसे समझ सकते हैं कि यदि स्कूल में नर्सरी की 90 सीटें हैं, इन सीटों पर जिन्हें पड़ोस, पूर्व छात्र व भाई-बहन मानकों के अंक मिल गए तो उनका दाखिला तो लगभग सुनिश्चित हो जाएगा, लेकिन यदि केवल सीटें 10 बचीं और उम्मीदवार 20 हैं तो एक समान अंक पाने वालों के लिए लॉटरी निकालनी पड़ेगी। अभी स्कूलों के आवेदन के आंकड़ों पर नजर डालें तो अधिकतर स्कूलों में एक-एक सीट पर तीन छात्रों की दावेदारी हो रही है। स्कूलों में सीटों से तिगुने फॉर्म जमा हुए हैं।
ऐसे में स्कूल लॉटरी का सहारा लेंगे ही। राजधानी के नामी डीपीएस, लक्ष्मण पब्लिक स्कूल, मदर्स इंटरनेशनल, मॉडर्न, वसंत वैली, मदर मैरी, प्रेजेंटेशन, सेंट जेवियर, सेंट कोलबंस, बाल भारती, डीएवी समेत अन्य कुछ स्कूलों में लॉटरी की स्थिति बनेगी।
एडमिशन नर्सरी डॉटकॉम के प्रमुख सुमित वोहरा कहते हैं कि यदि किसी बच्चे को मानकों में 100 में से 90 अंक मिल गए तो उसका दाखिला तो हो जाएगा। यदि इतने अंक वाले ज्यादा दावेदार हैं और सीटें बची हैं तो स्कूल लॉटरी निकालेंगे। इस सूरत में जिस भी अभिभावक को अपने बच्चे के लिए जिस स्कूल में सीट मिले, एक बार पक्की जरूर कर लें। यदि पहली सूची में किसी मनपसंद स्कूल में नाम नहीं आता तो अभिभावक दूसरी सूची की प्रतीक्षा करें।