निजी कॉलेजों में मची हलचल
इस मसौदे से निजी कॉलेज संचालकों में हलचल मची हुई है। संचालक इस मामले को लेकर एक बार फिर कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। उनका तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद ही राज्य फीस निर्धारण कमेटी बनी है। ऐसे में फीस रेगुलेट करने जैसा प्रस्ताव का कोई औचित्य नहीं है।
एडमिशन के बाद वाली वसूली पर लगेगी रोक
निजी कॉलेज संचालकों में हलचल मचने की बड़ी वजह यह भी है कि एनएमसी का मसौदा पास होने के बाद इनके यहां एडमिशन के बाद पढ़ाई के दौरान विभिन्न तरह के खर्चों पर पूरी तरह से पाबंदी लग जाएगी। छात्रों से अतिरिक्त वसूली नहीं हो पाएगी। हालांकि कैपिटेशन फीस पर 2016 से रोक है। इसके बाद भी किसी न किसी तरह के शुल्क वसूले जाने के आरोप लगते रहते हैं।
छात्रों को होगा लाभ
नए प्रस्ताव में 50 फीसदी सीटें रेगुलेट करने की तैयारी है। एनएमसी ने प्रस्ताव जारी कर दिया है। इसके लागू होने से छात्रों को फायदा मिलेगा।
- प्रो. एके सिंह, सचिव, स्टेट मेडिकल फैकल्टी।