स्कूली शिक्षा के लिए बनेगा नया राष्ट्रीय पाठ्यक्रम। (सांकेतिक तस्वीर)
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केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय इस साल के अंत तक स्कूली शिक्षा के लिए नया व व्यापक राष्ट्रीय पाठ्यक्रम तैयार करेगा। इसमें भारत से जुड़ी जानकारी, बच्चों में वैज्ञानिक सोच और 21वीं सदी के कौशल विकास आदि पर जोर दिया जाएगा। इसमें खास तौर पर सामाजिक समस्याओं का उल्लेख होगा। केंद्र सरकार की स्कूली शिक्षा व साक्षरता सचिव अनीता करवाल ने मंगलवार को स्टार्टअप भारत नवाचार सप्ताह पर आयोजित कार्यक्रम में यह जानकारी दी।
जाने माने वैज्ञानिक डॉ. के कस्तूरीरंगन के नेतृत्व में एक समिति विचार विमर्श कर रही
करवाल ने कहा कि हम नया राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा विकसित करने की प्रक्रिया में है। इस विषय पर जाने माने वैज्ञानिक डॉ. के कस्तूरीरंगन के नेतृत्व में एक समिति विचार विमर्श कर रही है। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक हम स्कूली शिक्षा के लिए नया और व्यापक राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा तैयार कर लेंगे। उन्होंने कहा कि इसके तहत बचपन से ही बच्चों में वैज्ञानिक सोच के विकास पर ध्यान दिया जाएगा। बच्चों में गणना संबंधी सोच विकसित करने पर फोकस रहेगा।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि केवल गणितीय ज्ञान पर जोर होगा, बल्कि तर्क करने की क्षमता के विकास पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें बच्चों में नागरिक गुणों के बोध संबंधी तत्वों को महत्व देने के साथ-साथ मौलिक कर्तव्य व अधिकार से जुड़े आयाम शामिल होंगे। इसी के तहत केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 2019 में सबसे पहले कृत्रिम बुद्धिमता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को कौशल शिक्षा से जोड़ा और इसे पठन-पाठन में शामिल किया था ।
कृत्रिम बुद्धिमता का उपयोग सामाजिक क्षेत्रों एवं समस्याओं के समाधान के लिए होना चाहिए। शिक्षा मंत्रालय ने पिछले साल वरिष्ठ वैज्ञानिक के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय राष्ट्रीय संचालन समिति का गठन किया था। समिति को स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक के पाठ्यक्रम की नई रूपरेखा तैयार करने का दायित्व सौंपा गया था।