नई प्रणाली से बढ़ेगी मान्यता, एआई करेगा मूल्यांकन
वर्तमान प्रणाली के अंतर्गत भारत के केवल 40 प्रतिशत विश्वविद्यालय और 18 प्रतिशत महाविद्यालय ही मान्यता प्राप्त हैं। नई प्रणाली के माध्यम से, NAAC, जो उच्च शिक्षा संस्थानों (HEI) का मूल्यांकन और मान्यता प्रदान करने वाली एक स्वायत्त संस्था है, का लक्ष्य अधिकांश उच्च शिक्षा संस्थानों को कवर करना और ईमानदारी संबंधी चिंताओं का समाधान करना है।
आने वाले मॉडल में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे अब कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में मूल्यांकन के लिए टीम को भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके बजाय, अलग-अलग लोगों से मिले फीडबैक यानी क्राउडसोर्स्ड जानकारी के आधार पर मूल्यांकन किया जाएगा।
नई मान्यता प्रणाली में संस्थानों को सिर्फ दो श्रेणियों में रखा जाएगा। "मान्यता प्राप्त" या "मान्यता प्राप्त नहीं"। विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन 55 मानकों, स्वायत्त कॉलेजों का 50 मानकों और संबद्ध कॉलेजों का 40 मानकों के आधार पर किया जाएगा। यदि कोई संस्थान तय मानकों से कम अंक लाता है, तो उसे मान्यता नहीं दी जाएगी। जैसे - विश्वविद्यालयों को कम से कम 50%, स्वायत्त कॉलेजों को 45% और संबद्ध कॉलेजों को 40% अंक लाने होंगे।
उच्च स्तर की मान्यता के लिए होंगे पांच ग्रेडेड लेवल
बुनियादी स्तर पर मान्यता मिलने के बाद, संस्थान अगले स्तर की परिपक्वता-आधारित ग्रेडेड मान्यता के लिए पात्र होंगे। इसमें कुल पांच स्तर होंगे। स्तर 1 से लेकर स्तर 5 तक।
जिन संस्थानों को पहले से NAAC की ओर से A, A+ या A++ ग्रेड मिल चुका है, वे सीधे इस परिपक्वता-आधारित मान्यता के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इस प्रणाली में जैसे-जैसे स्तर ऊपर जाते हैं, वैसे-वैसे मापदंडों की संख्या और उनकी जटिलता भी बढ़ती है। इससे संस्थान की योग्यता और आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति को समझा जा सकेगा।
उदाहरण के लिए, जो विश्वविद्यालय बुनियादी 55 मापदंडों पर खरा उतरता है, उसे उच्च स्तर पर पहुंचने के लिए लगभग 80 से 100 मापदंड पूरे करने होंगे। अध्यक्ष ने कहा कि हर स्तर के लिए मापदंडों को साफ और सटीक बनाया जा रहा है ताकि संस्थान अपनी मर्जी से इसमें शामिल हों और खुद को बेहतर बना सकें।
लेवल 3 से 5 तक ही होंगे साइट विजिट
भविष्य में, कॉलेज या यूनिवर्सिटी के कैंपस का दौरा (भौतिक दौरा) सिर्फ लेवल 3, 4 और 5 की मान्यता प्रक्रिया में किया जाएगा। वो भी पूरा नहीं, बल्कि कुछ हिस्सा ऑनलाइन और कुछ साइट पर जाकर किया जाएगा, जिससे किसी तरह की गड़बड़ी या हेरफेर की संभावना कम हो सके।
NAAC के अध्यक्ष ने बताया कि इस नई प्रणाली में मशीन लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे संस्थानों द्वारा दिए गए डेटा को स्कैन किया जाएगा। इस डेटा को सत्यापित करने के लिए बड़ी संख्या में प्रोफेशनल्स में से रैंडम तरीके से एक पैनल चुना जाएगा। इस पैनल में प्रोफेसर, रिटायर्ड वाइस चांसलर, इंडस्ट्री एक्सपर्ट, NGO से जुड़े लोग और प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे।
संस्थान के दस्तावेजों और दावों के आधार पर कुछ सवाल तैयार किए जाएंगे और इन्हें करीब 100 अलग-अलग लोगों को भेजा जाएगा। ये लोग दिए गए डेटा की सच्चाई का आकलन करेंगे। इनके जवाबों के आधार पर उस संस्था के लिए एक "विश्वसनीयता स्कोर" तैयार किया जाएगा, जो 0 से 1 के बीच होगा।
स्कोर घटेगा या बढ़ेगा दस्तावेजों की सच्चाई पर
हर संस्थान को शुरुआत में 0.5 का "विश्वसनीयता स्कोर" मिलेगा। अगर विशेषज्ञों को लगता है कि संस्थान ने जो दस्तावेज जमा किए हैं, वे सही हैं तो स्कोर बढ़ेगा। लेकिन अगर उनमें कोई गड़बड़ी या धोखाधड़ी पाई गई तो स्कोर घट जाएगा। इतना ही नहीं, दस्तावेजों की जांच करने वाले विशेषज्ञों की निगरानी भी एआई तकनीक से की जाएगी।
NAAC अध्यक्ष ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया भारत में ही तैयार की गई है और इसका आधार है - "हम भरोसा करते हैं, लेकिन जांच के साथ।" अगर कोई संस्थान फर्जी दस्तावेज देता है और दोषी पाया जाता है तो उसकी मान्यता तीन साल तक के लिए रोकी जा सकती है।
नई प्रणाली में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की कई अहम बातें भी जोड़ी गई हैं जैसे - नवाचार को बढ़ावा देना, अलग-अलग भाषाओं का उपयोग (बहुभाषावाद), कोर्स छोड़ने और दोबारा जुड़ने की सुविधा (मल्टी एंट्री-एग्जिट), पर्यावरण की चिंता (सस्टेनेबिलिटी), और ग्लोबल लेवल पर शिक्षा (अंतर्राष्ट्रीयकरण)। इतना ही नहीं, भारत में कैंपस खोलने वाले विदेशी विश्वविद्यालय भी इस प्रणाली के तहत मान्यता के लिए आवेदन कर सकेंगे।