बच्चों को मोटी-मोटी किताबें नहीं पढ़नी पड़ेंगी। नई नीति में बच्चों को हर विषय के मूल सिद्धांत को आसान तरीकों से समझाया जाएगा। ऐसे में पूरा जोर लिखित परीक्षा की जगह प्रयोगात्मक परीक्षा पर होगा। पढ़ाई का फोकस और कांसेप्ट आइडिया, एप्लीकेशन, प्रैक्टिकल, प्राब्लम साल्विंग पर रहेगा। सरकार का मानना है कि दो से आठ साल तक बच्चा सबसे अधिक सीखता है।
इसलिए इस उम्र में सीखने पर जोर दिया जाए। बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान को सही से सीखने के लिए जरूरी मानते हुए बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान पर एक राष्ट्रीय मिशन की स्थापना की जाएगी।
एनसीईआरटी आठ वर्ष तक के बच्चों के लिए प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (एनसीपीएफईसीसीई) के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचा विकसित करेगा। एक विस्तृत और मजबूत संस्थान प्रणाली के माध्यम से प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) मुहैया कराई जाएगी। इसमें आंगनबाडी और प्री-स्कूल भी शामिल होंगे जिसमें इसीसीई शिक्षाशास्त्र और पाठ्यक्रम में प्रशिक्षित शिक्षक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता होंगे।
छात्र करेंगे मूल्यांकन, देंगे प्रगति रिपोर्ट
स्कूली पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों में मेलजोल बढ़ाने के लिए प्रगति रिपोर्ट कार्ड योजना शुरू होगी। इसमें छात्र पढ़ाई को छोड़कर अन्य एक्टिविटी पर एक-दूसरे का मूल्यांकन करेंगे। इसके आधार पर प्रगति रिपोर्ट बनेगी। प्रगति कार्ड एक बहुआयामी होगा। इसमें प्रत्येक छात्र की विशिष्टता विस्तार से पता चलेगी और संज्ञानात्मकता की जानकारी भी मिलेगी। इसमें छात्र के व्यवहार, बातचीत, मदद, टीम वर्क आदि का आंकलन होगा।
छात्रों के लिए वित्तीय सहायता
एससी, एसटी, ओबीसी और अन्य श्रेणियों से जुड़े हुए छात्रों की योग्यता को प्रोत्साहित किया जाएगा। छात्रवृत्ति पाने के लिए छात्रों को बढ़ावा देने और उसकी प्रगति की निगरानी करने के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल का विस्तार किया जाएगा।
निजी उच्च शिक्षण संस्थानों को छात्रों को बड़ी संख्या में मुफ्त शिक्षा और छात्रवृत्तियों की पेशकश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। कस्तूरबा गांधी स्कूलों का विस्तार 12वीं कक्षा तक होगा। जिनकी इकलौती संतान बेटी हो और बेटियों को शिक्षा में बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं बनेंगी।