लोगों के स्वास्थ्य पर दिखा असर
बस्ती की निवासी अन्नाकली बताती हैं कि पहले परिवार को अक्सर पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता रहती थी। हालांकि इस तकनीक के इस्तेमाल के बाद स्थिति में सुधार आया है। प्रोजेक्ट अमृत के अनुसार, इस पहल से जुड़े परिवारों में 300 से अधिक स्वास्थ्य सुधार दर्ज किए गए हैं।
युवाओं को बनाया गया 'अमृत एम्बेसडर'
देविका ने केवल उपकरण लगाने तक ही काम सीमित नहीं रखा। परियोजना के तहत बस्ती के 70 युवा स्वयंसेवकों को 'अमृत एम्बेसडर' के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। इनमें कई युवा महिलाएं भी शामिल हैं। ये स्वयंसेवक उपकरणों की देखरेख करते हैं और लोगों को इसके इस्तेमाल के बारे में जागरूक करते हैं।
समुदाय की भागीदारी पर आधारित है मॉडल
प्रोजेक्ट अमृत का उद्देश्य केवल साफ पानी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि समुदाय को इसकी जिम्मेदारी में भागीदार बनाना भी है। इस मॉडल में स्वच्छ पानी को हर व्यक्ति का अधिकार मानते हुए स्थानीय लोगों की भागीदारी पर जोर दिया गया है।
इस पहल को कई जनप्रतिनिधियों का समर्थन मिला है। इसके अलावा इस परियोजना पर आधारित Measured in Blue नामक लघु डॉक्यूमेंट्री अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में भी प्रदर्शित की जा चुकी है।
लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में आया बदलाव
कुसुमपुर पहाड़ी में आज भी पानी टैंकरों से ही आता है, लेकिन अब उसे स्टोर करने के बाद दूषित होने का डर पहले की तुलना में कम हुआ है। स्थानीय लोगों के लिए यही सबसे बड़ा बदलाव है, जिसने उनके दैनिक जीवन को आसान बनाने में मदद की है।